Monday, 13 July 2026
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अमेरिकी महिला ने भारत की सस्ती दवाओं की तारीफ की: बोली- अमेरिका में ₹85 हजार की गोली, भारत में सिर्फ ₹35

 

नई दिल्ली। भारत में सस्ती दवाओं और कम लागत वाले इलाज की एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हो रही है। इस बार एक अमेरिकी महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें वह दावा करती है कि अमेरिका में जिस कैंसर की दवा की एक गोली की कीमत करीब ₹85 हजार है, वही दवा भारत में ₹35 से ₹300 के बीच उपलब्ध है। वीडियो में महिला ने अमेरिकी स्वास्थ्य व्यवस्था की आलोचना करते हुए कहा कि "अमेरिका में लोगों को लूटा जा रहा है, जबकि भारत अपने लोगों को किफायती स्वास्थ्य सेवाएं देता है।"

कैंसर की दवा की कीमत बताकर किया दावा

इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो में अमेरिकी महिला लिज़ (Liz) ने बताया कि उनकी मौसी एक प्रकार के ब्लड कैंसर से पीड़ित हैं और उन्हें Revlimid नाम की दवा लेनी पड़ती है। उनका दावा है कि अमेरिका में इस दवा की एक गोली की कीमत लगभग 900 डॉलर (करीब ₹85 हजार) है, जबकि भारत में इसी दवा के जेनेरिक विकल्प ₹35 से ₹300 प्रति गोली में उपलब्ध हैं।

भारत की सस्ती दवाओं की तारीफ

वीडियो में लिज़ ने कहा कि भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां दवाएं काफी सस्ती मिलती हैं। उनके अनुसार भारत में जेनेरिक दवाओं की उपलब्धता के कारण मरीजों को कम खर्च में इलाज मिल जाता है, जबकि अमेरिका में दवाओं की ऊंची कीमतें आम लोगों पर बड़ा आर्थिक बोझ डालती हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

लिज़ का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लाखों लोग इसे देख चुके हैं और बड़ी संख्या में यूजर्स ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। कई लोगों ने भारत की जेनेरिक दवा व्यवस्था की सराहना की, जबकि कुछ यूजर्स ने अमेरिका में दवाओं की ऊंची कीमतों पर चिंता जताई।

एक और अमेरिकी महिला ने भी उठाया था मुद्दा

रिपोर्ट के अनुसार, कुछ समय पहले एक अन्य अमेरिकी महिला विक्टोरिया ने भी भारत से दवा खरीदने का अपना अनुभव साझा किया था। उनका दावा था कि अमेरिका में करीब 1,000 डॉलर की दवा उन्हें भारत से मात्र 25 डॉलर में मिल गई। उन्होंने अमेरिकी स्वास्थ्य व्यवस्था को "स्कैम" तक बताया था।

कीमतों में अंतर क्यों?

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में कई जीवनरक्षक दवाओं के जेनेरिक संस्करण उपलब्ध हैं, जिनकी कीमत मूल ब्रांडेड दवाओं की तुलना में काफी कम होती है। वहीं अमेरिका में पेटेंट, बीमा व्यवस्था, दवा कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति और स्वास्थ्य प्रणाली के कारण कई दवाओं की कीमतें काफी अधिक हो सकती हैं। अलग-अलग देशों में दवाओं की कीमतें उनके ब्रांड, निर्माता, नियामकीय नियमों और उपलब्ध विकल्पों के आधार पर भी बदलती हैं।

अब आगे क्या?

अमेरिकी महिला का यह वीडियो भारत की किफायती दवा व्यवस्था पर नई बहस छेड़ रहा है। हालांकि वीडियो में किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है। दवा की वास्तविक कीमत उसके ब्रांड, निर्माता, डोज़ और देश के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

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