वरिष्ठ पत्रकार अंजना ओम कश्यप और टीवी टुडे नेटवर्क ने लोकप्रिय शिक्षक फैसल खान उर्फ खान सर समेत कई लोगों के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया है। याचिका में कथित रूप से अपमानजनक और मानहानिकारक टिप्पणियों को हटाने, भविष्य में ऐसे पोस्ट रोकने तथा 2 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की गई है।
दिल्ली हाईकोर्ट में होगी सुनवाई
यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया है। न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित कथित आपत्तिजनक सामग्री को हटाने के निर्देश देने की मांग की है।
खान सर समेत कई शिक्षक बनाए गए पक्षकार
मुकदमे में खान सर के अलावा शिक्षक अभिनव शर्मा, बबीता त्यागी और अरविंद भदौरिया को भी प्रतिवादी बनाया गया है। कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स और 4PM न्यूज नेटवर्क को भी इस मामले में पक्षकार बनाया गया है।
टीवी डिबेट के बाद शुरू हुआ विवाद
याचिका के अनुसार विवाद की शुरुआत 29 मई 2026 को प्रसारित एक टीवी बहस के बाद हुई। बहस के दौरान अंजना ओम कश्यप ने ऑनलाइन "स्टार टीचर्स" के बढ़ते प्रभाव और शिक्षा के व्यावसायीकरण पर टिप्पणी की थी। उनका कहना है कि यह टिप्पणी राष्ट्रीय महत्व के एक विषय पर की गई सामान्य पत्रकारिता टिप्पणी थी।
सोशल मीडिया पर चलाया गया अभियान: दावा
याचिका में आरोप लगाया गया है कि 30 मई से 4 जून के बीच कई प्रतिवादियों ने सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उनके और नेटवर्क के खिलाफ अभियान चलाया। दावा किया गया है कि इस दौरान कई वीडियो, पोस्ट और प्रसारणों में पत्रकार और मीडिया संस्थान के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया।
प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का आरोप
अंजना ओम कश्यप और टीवी टुडे नेटवर्क का कहना है कि इन टिप्पणियों ने उनकी प्रतिष्ठा, गरिमा और पेशेवर छवि को नुकसान पहुंचाया है। याचिका में कहा गया है कि आलोचना की सीमाओं को पार कर व्यक्तिगत हमले किए गए, जिससे सार्वजनिक रूप से उनकी छवि प्रभावित हुई।
बच्चे की निजी जानकारी उजागर करने का आरोप
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि खान सर ने सार्वजनिक चर्चा के दौरान अंजना ओम कश्यप के बच्चे के स्कूल से जुड़ी जानकारी का उल्लेख किया। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह जानकारी विवाद से असंबंधित थी और इससे परिवार की निजता, सुरक्षा और निजी जीवन पर असर पड़ा।
₹2 करोड़ हर्जाने की मांग
याचिका में अदालत से 2 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की गई है। साथ ही प्रतिवादियों को भविष्य में ऐसे कथित मानहानिकारक बयान और पोस्ट प्रकाशित करने से रोकने की भी अपील की गई है।
कानूनी लड़ाई पर टिकी नजरें
पत्रकारिता, सोशल मीडिया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े इस मामले पर अब सभी की नजरें दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत के आगामी आदेश से यह स्पष्ट होगा कि इस विवाद में आगे कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ेगी।
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