नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एक और बड़ा झटका लगा है। पार्टी के राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बरेक ने गुरुवार को उच्च सदन की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के साथ ही एक सप्ताह के भीतर राज्यसभा से इस्तीफा देने वाले TMC सांसदों की संख्या तीन हो गई है। इस घटनाक्रम ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी में बढ़ती अंदरूनी असंतोष की चर्चाओं को और तेज कर दिया है।
एक सप्ताह में तीसरा इस्तीफा
प्रकाश चिक बरेक का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब हाल ही में वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रे और सुष्मिता देव भी राज्यसभा की सदस्यता छोड़ चुके हैं। लगातार हो रहे इन इस्तीफों को TMC के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
राज्यसभा में घटती ताकत
प्रकाश बरेक के इस्तीफे के बाद राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस की संख्या घटकर 10 सांसदों तक पहुंचने की बात कही जा रही है। राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि आने वाले दिनों में कुछ और सांसद भी पार्टी से दूरी बना सकते हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कौन हैं प्रकाश चिक बरेक?
45 वर्षीय प्रकाश चिक बरेक पश्चिम बंगाल के आदिवासी समुदाय से आने वाले नेता हैं। वे 2023 में तृणमूल कांग्रेस की ओर से राज्यसभा भेजे गए थे। राजनीति में आने से पहले वे चाय उद्योग और श्रमिक संगठनों से जुड़े रहे हैं। पार्टी में उन्हें अभिषेक बनर्जी के करीबी नेताओं में गिना जाता रहा है।
इस्तीफे के पीछे क्या वजह?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार प्रकाश बरेक ने अपने इस्तीफे के बाद कहा कि पश्चिम बंगाल में जनता का जनादेश भाजपा के पक्ष में दिखाई दे रहा है और इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने यह फैसला लिया है। हालांकि उन्होंने भविष्य की राजनीतिक रणनीति को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया है।
सुष्मिता देव के इस्तीफे से भी बढ़ी चर्चा
प्रकाश बरेक के इस्तीफे से एक दिन पहले ही सुष्मिता देव ने भी राज्यसभा और पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। बाद में उनकी असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दे दी।
पार्टी में बढ़ रही बगावत की चर्चा
लगातार हो रहे इस्तीफों के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में TMC के भीतर असंतोष और संभावित गुटबाजी की चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दल इसे ममता बनर्जी के नेतृत्व के लिए चुनौती बता रहे हैं, जबकि पार्टी की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
कांग्रेस से नजदीकी की अटकलें
हाल के दिनों में विपक्षी गठबंधन की बैठकों और विभिन्न नेताओं की मुलाकातों के बाद कांग्रेस और TMC के संबंधों को लेकर भी कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि दोनों दल सार्वजनिक रूप से किसी भी विलय या औपचारिक राजनीतिक समझौते की खबरों से इनकार कर चुके हैं।
आगे क्या?
राज्यसभा में लगातार हो रहे इस्तीफों ने TMC के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या यह केवल कुछ नेताओं की नाराजगी है या फिर पार्टी के भीतर किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की शुरुआत। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व की रणनीति और संभावित नए घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।
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