Friday, 29 May 2026
Swaraj Express
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मध्य प्रदेश

लाइसेंस दिलाने के बदले निजी खाते में लिया डेढ़ लाख का घूस, फिर भी 3 साल से जांच जारी।

एक कहावत है जब बाड़ ही खेत को चरने लगे तो उस खेत की रखवाली कौन करेगा,,कुछ ऐसा ही हो रहा है मंत्रालय के गृह विभाग में...हांलाकि सम्पूर्ण विभाग की बात नही हो रही है..बात केवल हो रही है पसारा ( यानि निजी सुरक्षा एजेन्सी) के लाइसेन्स जारी किये जाने वाले विभाग की. जिसमे कार्यरत पुलिस जवान काम के बदले न कैस और न काइन्ड सीधे खाते मे पारितोषिक लेते है...वह भी शैलरी एकाउन्ट में....खैर यह तो रहा मामला भ्रष्टाचार का जो लगभग सभी विभागों मे घुन की तरह लग चुका है..इस पर फिर कभी बात करेंगे.. अभी बात करते है विभाग मे प्रतिनियुक्ति मे पदस्थ सचिव महोदया की..जिन्होने सालों पुरानी परम्परा को तोड़ा है...हांलाकि उन्होने बहुत हिमाकत भरा काम किया है..जो कर्मचारी उनके विभाग मे सालों से मौखिक आदेश पर पीएचक्यू से आकर मंत्रालय मे अपनी सेवायें दे रहे थे...उसे लिगलाइज करने का काम किया है...लेकिन उनका यह आदेश उल्टा पड़ता नजर आ रहा है..दरअसल गृह विभाग के अन्तर्गत आने वाले पसारा विंग में बड़े छोटे मिलाकर कुल 34 कर्मचारी है जिनमे सिर्फ दो मंत्रालयीन विभाग के अन्तर्गत आते है शेष 32 पीएचक्यू के अधीनस्थ है..मगर उनका कोई भी लिखित आदेश कहीं भी उपलब्ध नही है..जबकि कुछ कर्मचारी पिछले बीस साल से मंत्रालय मे ही कर्यरत हैं...जिनमें कुछ तो ऐसे हैं जो कागज मे दूसरे जिले मे पदस्थ हैं...जबकि नियमानुसार किसी भी विभाग के कर्मचारी को मंत्रालय मे यदि सलग्न किया जाता है तो सामान्य प्रशासन विभाग ही आदेश निकाल सकता है मगर खुद सामान्य प्रशासन विभाग के द्वारा 2016 में निकाला गया आदेश यह कहता है कि मंत्रालयीन सेवा मे कोई भी बाहरी कर्मचारी को संलग्न नहीं किया जयेगा .. लेकिन खुद प्रतिनियुक्ति पर सचिव पद पर पदस्थ कृष्णावेणी देशावतु ने विशेष पुलिस महानिदेशक प्रशासन को दो निजी सुरक्षा एजेन्सी में कार्यरत कर्मचारियों की मंत्रालय में पदस्थापना करनें हेतु पत्र जारी कर दिया...पत्र मे दोनों कर्मचारियों के नाम तो उल्लेखित थे ही साथ मे अन्त मे यह भी लिखा है कि आदेश शीघ्र जारी करने का कष्ट करें...यद्यपि पीएचक्यू ने शासन के नियमों का पालन किया और किसी भी तरह का आदेश जारी नहीं किया . बहरहाल यह रही कृष्णावेणी की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगाये जाने वाली चर्चा....अब यह पत्र कृष्णावेणी जी ने क्यो जारी किया इसकी तह मे जाते हैं...तो उक्त दोनों कर्मचारियो को तत्कालीन डिप्टी सेकेट्री होम इच्छित गणपाले ने मुख्यमंत्री सचिवालय के निर्देश पर 21 जुलाई 2025 को एक भ्रष्टाचार के मामले मे जांच कर 7 दिन के अन्दर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने हेतु पत्र जारी किया जिस पर दोनो ने 29 जुलाई 2025 को एक जैसी ही भाषा में गोलमाल जबाब देकर इतिश्री कर ली..वह इसलिये कि वो भ्रष्टाचार का मामला भी उनके साथ काम करने वाले से जुड़ा था...जिस पर इच्छित गणपाले ने उन दोनो के खिलाफ 7 अगस्त 2025 को यह चेतावनी देते हुए कि आपके द्वारा जो जानकारी दी गई है वह पूर्णतः अपूर्ण है इसलिये क्यो न आप दोनो के खिलाफ मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियम के तहत् अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाय...कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया.....लेकिन इस बीच सचिव महोदया ने 19 अगस्त को उक्त दोनो कर्मचारियों को मंत्रालय में सलग्न करने हेतु पुलिस मुख्यालय को पत्र भेज दिया बस यही पत्र दोनों के जबाब मे तुरुप के पत्ते का काम किया...दोनों ने 21 अगस्त को दिये गये अपने जबाब मे जो कुछ और लिखा वह अलहदा रहा मगर इस बात का उल्लेख प्रमुखता से किया कि मैं सचिव गृह और नियंत्रक प्राधिकारी निजी सुरक्षा एजेन्सी से प्राप्त निर्देशों के उपरांत ही निजी सुरक्षा शाखा बल्लभ भवन मे काम कर रहा हूं जिसका उल्लेख उन्होने यानि सचिव महोदया ने 19 अगस्त को पुलिस मुख्यालय को भेजे गये पत्र मे भी किया है...साथ ही कारण बताओ नोटिस के जबाब के साथ दोनो ने सचिव महोदया के भेजे गये पत्र की कापी भी संलग्न कर दी...फिर क्या था जादू की छड़ी घूम गई और दोनो कर्मचारी अभी भी ठाठ के साथ वही डटे है..साथ ही जिन मोहतर्मा ने शैलरी एकाउन्ट मे घूस ली थी वो भी मैडम के स्टाफ मे ही चैन की बंसी बजा रही हैं...उधर डिप्टी सेकेट्री इच्छित गणपाले भी अन्यत्र जाते रहे.....अन्त मे कहेगे कि मुख्यमंत्री कार्यालय के सख्त निर्देश के बाद भी जांच जांच और परिणाम ढाक के तीन पात ...    

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