चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और अभिनेता से नेता बने सी. जोसेफ विजय ने अपनी आखिरी फिल्म जना नायकन के निर्माता के. वेंकट नारायण को नई दिल्ली में राज्य का विशेष प्रतिनिधि (Special Representative) नियुक्त किया है। कैबिनेट रैंक वाले इस पद पर नियुक्ति के बाद विपक्ष ने सरकार पर हितों के टकराव (Conflict of Interest) और करीबी सहयोगियों को अहम पद देने के आरोप लगाए हैं। हालांकि, सरकार की ओर से नियुक्ति को लेकर अभी कोई विस्तृत आधिकारिक सफाई सामने नहीं आई है।
कौन हैं के. वेंकट नारायण?
के. वेंकट नारायण बेंगलुरु स्थित केवीएन ग्रुप (KVN Group) के चेयरमैन हैं। उनका समूह रियल एस्टेट और मनोरंजन क्षेत्र में कारोबार करता है। उन्होंने वर्ष 2020 में केवीएन प्रोडक्शंस की स्थापना की थी, जो मुख्यमंत्री विजय की अंतिम फिल्म जना नायकन का निर्माण कर रही है। फिल्मी दुनिया से उनके इस करीबी संबंध के कारण ही यह नियुक्ति राजनीतिक बहस का विषय बन गई है।
किस पद पर हुई नियुक्ति?
तमिलनाडु सरकार ने एक वर्ष के लिए विशेष प्रतिनिधि (Special Representative) का अस्थायी पद सृजित कर के. वेंकट नारायण की नियुक्ति की है। यह पद कैबिनेट मंत्री के दर्जे का माना जाता है। इस पद का मुख्य काम नई दिल्ली में केंद्र सरकार और तमिलनाडु सरकार के बीच समन्वय स्थापित करना, केंद्रीय मंत्रालयों के साथ बैठकें आयोजित करना, राज्य की परियोजनाओं और वित्तीय मामलों की पैरवी करना तथा संसद सत्र के दौरान राज्य के हितों से जुड़े मामलों का समन्वय करना होता है।
विपक्ष ने क्यों उठाए सवाल?
नियुक्ति के बाद डीएमके, भाजपा और एआईएडीएमके समेत कई विपक्षी दलों ने सरकार की आलोचना की। विपक्ष का कहना है कि यह पद परंपरागत रूप से अनुभवी राजनेताओं को दिया जाता रहा है, जबकि इस बार मुख्यमंत्री के करीबी फिल्म निर्माता को नियुक्त किया गया है। आलोचकों का आरोप है कि यह फैसला योग्यता से अधिक व्यक्तिगत संबंधों के आधार पर लिया गया है।
सत्तारूढ़ दल का क्या कहना है?
टीवीके (TVK) के एक वरिष्ठ नेता ने इस नियुक्ति का बचाव करते हुए कहा कि यह किसी राजनीतिक लाभ का पद नहीं है, बल्कि मुख्यमंत्री विजय की ओर से एक ऐसे व्यक्ति के प्रति आभार व्यक्त करने का तरीका है, जिसने उनके राजनीतिक और फिल्मी करियर के कठिन दौर में उनका साथ दिया। पार्टी का कहना है कि वेंकट नारायण का कॉर्पोरेट और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र का अनुभव इस पद के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
पहले भी करीबी लोगों को मिली हैं अहम जिम्मेदारियां
यह मुख्यमंत्री विजय सरकार की ऐसी तीसरी नियुक्ति है, जिसमें उनके करीबी लोगों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है। इससे पहले उनके पूर्व मैनेजर जगदीश पलानीस्वामी को राजनीतिक निजी सचिव (Private Secretary - Political) नियुक्त किया गया था। वहीं, ज्योतिषी रिकी राधन पंडित वेट्टिवेल को राजनीतिक ओएसडी बनाया गया था, लेकिन आलोचना के बाद वह नियुक्ति वापस ले ली गई थी।
हितों के टकराव की बहस क्यों?
विपक्ष का कहना है कि मुख्यमंत्री की फिल्म के निर्माता को राज्य का विशेष प्रतिनिधि बनाना हितों के टकराव की स्थिति पैदा करता है। हालांकि, अब तक किसी सरकारी एजेंसी ने इस नियुक्ति में नियमों के उल्लंघन या कानूनी अनियमितता की पुष्टि नहीं की है। फिलहाल यह मामला राजनीतिक विवाद का विषय बना हुआ है।
अब आगे क्या?
आने वाले समय में के. वेंकट नारायण के कामकाज पर सभी की नजर रहेगी। यदि वह केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में सफल रहते हैं, तो सरकार अपने फैसले को सही ठहराने की कोशिश करेगी। वहीं विपक्ष इस नियुक्ति को लेकर सरकार को लगातार घेरने की तैयारी में है। फिलहाल यह मुद्दा तमिलनाडु की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।
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