Wednesday, 15 April 2026
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ऑटो Bhopal

डिप्टी कमिश्नर का सम्मिलियन का खेल ..लोकायुक्त का असर भी हो रहा फेल

भोपाल: भोपाल नगर निगम भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है, यह खबर तो आये दिन मीडिया की सुर्खियां बनती रही है, मगर पिछले महीने जब लोकायुक्त की टीम ने निगम के कार्यालय में छापा मारा तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आये... लोकायुक्त की टीम ने निगम के फतेहगढ़ और सेंट्रल वर्कशॉप में जब दबिश दी तो पता चला कि निर्माण कार्यों एवं वाहन की मरम्मत के नाम पर फर्जी ई-बिल बनाकर करोड़ों रुपये का वारा-न्यारा किया जा रहा है... लोकायुक्त की टीम SAP सॉफ्टवेयर का डाटा और अन्य रिकॉर्ड जब्त करके उसके डाटा को खंगाल रही है... इसके अलावा शुरुआती जांच में ही दोषी पाए जाने पर एक अपर आयुक्त सहित कुछ और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की है... जिसके कारण एक-दो अधिकारियों को निगम से चलता भी कर दिया है...

यह तो रही वह खबर, जिसकी जानकारी सभी को है... लेकिन अब हम आपको बताते हैं ऐसी खबर के बारे में, जिसका खेल पर्दे के पीछे अभी भी चल रहा है... इनमें से एक अधिकारी ऐसे हैं, जिनको लोकायुक्त की टीम ने दोषी तो पाया, मगर उन्होंने अपने आकाओं के जरिये सारा मामला मैनेज कर लिया है... लेकिन यह बात शायद उनको भी नहीं पता कि जनाब के खिलाफ भी लोकायुक्त ने एफआईआर दर्ज कर ली है... या फिर पता भी है तो उसको छुपाया जा रहा है...

खैर, नगर निगम में लंबे समय से जमे ये अधिकारी महोदय लोकायुक्त के छापे के बाद भी उसी पावर के साथ, उसी शैली में काम कर रहे हैं, मतलब अभी भी कमीशन की कहानी के गीत आलापे जा रहे हैं... हालांकि कागजों में उनके पास जो मलाईदार विभाग थे, वो हटा लिये गये हैं, मगर हटाये गये विभागों के सारे काम परोक्ष रूप से इन्हीं अधिकारी के जिम्मे हैं... और सारा लेनदेन भी इन्हीं के जरिये हो रहा है...

अब आगे की कहानी यह है कि ये जनाब जिस विभाग से निगम में डेपुटेशन पर आये थे, वहां वापस जाना नहीं चाहते... क्योंकि वहां ये सहायक यंत्री के पद पर थे, तो यहां डिप्टी सेक्रेटरी... साथ में काम भी मलाईदार... ऐसे में ये साहब पूरी तन्मयता के साथ निगम में ही डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर सम्मिलियन कराने में जुट गये हैं... जिसकी फाइल भी बाकायदा शासन स्तर पर चल पड़ी है...

अब आपको बताते हैं कि इनका निगम में सम्मिलियन कराने का ठेका किसने लिया है... तो इनकी मदद एक भाजपा नेता के साथ एक आईएएस अधिकारी कर रहे हैं, जो इस समय मंत्रालय में पदस्थ हैं... हां, महोदय का सम्मिलियन कराने को लेकर डील भी जो हुई है, वह एक करोड़ से भी ऊपर की है...

अब ये एक करोड़ रुपये ये अपना घर-बार बेचकर तो देंगे नहीं... निश्चित ही निगम में ही घपला-घोटाला किया होगा या आगे कर भी रहे होंगे... वैसे भी घूस के पैसे घूस लेकर ही दिये जाते हैं, ऐसी परंपरा रही है...

तो यह रही आज की खबर... चलते-चलते इन साहब के मोबाइल पर भी नजर डाल लेते हैं... साहब का नंबर है... 9425..4902...

अंत में साहब को यह भी बता देते हैं कि उनके चाहने वाले ने उनकी संपत्ति का सारा ब्यौरा एकत्रित कर लिया है, जिसकी पूरी रिपोर्ट यानी जानकारी जल्द ही लोकायुक्त में दी जा रही है... चाहने वाले भी निगम से ही जुड़े हैं और पिछले कई महीनों से वे उनकी संपत्ति की छानबीन भी कर रहे हैं...

ऐसे में यदि लोकायुक्त ने नई शिकायत के आधार पर एक और प्रकरण दर्ज कर लिया, तो जाहिर है कि उनके सम्मिलियन के रास्ते में पूर्णविराम लग जाएगा...

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