देश की शिक्षा व्यवस्था और पाठ्यक्रम को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अहम बयान दिया है। उन्होंने माना कि UGC के नए नियमों और NCERT की किताबों में ‘न्यायिक भ्रष्टाचार’ जैसे विषयों को शामिल करने से जो विवाद खड़ा हुआ, उसे बेहतर तरीके से संभालकर टाला जा सकता था। उन्होंने स्वीकार किया कि इन मुद्दों की प्रस्तुति में कमी रह गई।
सरकार का रुख साफ—भेदभाव के खिलाफ हैं
धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार अनुसूचित जाति (SC), जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) सहित सभी वर्गों के साथ समानता का व्यवहार करना सरकार की जिम्मेदारी है और इसी दिशा में नीतियां बनाई जा रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में नया सिलेबस तैयार
NCERT विवाद पर मंत्री ने बताया कि अब पाठ्यक्रम में बदलाव सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत किया जा रहा है। कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की किताब में ‘न्यायिक भ्रष्टाचार’ और जजों की कमी जैसे विषयों को लेकर उठे विवाद के बाद NCERT ने वह किताब वापस ले ली थी। अब इस अध्याय को दोबारा तैयार करने के लिए जस्टिस इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है, जिसमें पूर्व अटॉर्नी जनरल और एक शिक्षाविद भी शामिल हैं।
नई कमेटी करेगी संशोधन, सुझाव भी होंगे शामिल
मंत्री के अनुसार, यह कमेटी भोपाल लॉ एकेडमी समेत विभिन्न संस्थानों के सुझावों को ध्यान में रखते हुए नया अध्याय तैयार करेगी। इसके बाद संशोधित पाठ्यक्रम को सुप्रीम कोर्ट के सामने प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और संतुलन सुनिश्चित किया जा सके।
UGC नियमों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला अहम
जनवरी 2026 में लागू ‘UGC इक्विटी रेगुलेशन’ को लेकर भी विवाद जारी है। इस नियम का उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों में भेदभाव रोकना था, लेकिन इसे सामान्य वर्ग के कुछ छात्रों ने अदालत में चुनौती दी है। फिलहाल यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि अदालत का जो भी फैसला होगा, सरकार उसे पूरी तरह लागू करेगी।
आगे संवेदनशीलता के संकेत
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