गुना। मध्य प्रदेश के गुना जिले में सरकारी स्कूलों की व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। 23 जून 2026 की सुबह फतेहगढ़ रूट पर किए गए स्थल निरीक्षण के दौरान कई शासकीय स्कूल निर्धारित समय पर बंद मिले, जबकि कुछ विद्यालयों में शिक्षकों की अनुपस्थिति भी सामने आई। यह स्थिति तब सामने आई है, जब राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के बड़े-बड़े दावे कर रही है।
तय समय के बावजूद स्कूलों पर लटके मिले ताले
जानकारी के अनुसार, 16 जून 2026 से जिले के सभी शासकीय विद्यालयों का संचालन सुबह 7:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक किया जा रहा है। इसके बावजूद निरीक्षण के दौरान कई विद्यालय निर्धारित समय पर बंद पाए गए, जिससे शिक्षा व्यवस्था की गंभीर लापरवाही उजागर हुई।
ये स्कूल मिले बंद
निरीक्षण के दौरान शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल झागर, माध्यमिक विद्यालय झागर, शासकीय विद्यालय धाननखेड़ी, माध्यमिक विद्यालय बनेह, माध्यमिक विद्यालय सुहाया और माध्यमिक विद्यालय लालोनी बंद मिले। स्कूलों में ताले लगे होने से स्थानीय लोगों ने भी नाराजगी जताई।
कई स्कूलों में शिक्षक भी रहे अनुपस्थित
सिर्फ स्कूल बंद ही नहीं मिले, बल्कि कुछ विद्यालयों में शिक्षकों की अनुपस्थिति भी सामने आई। प्राथमिक विद्यालय लालोनी और प्राथमिक विद्यालय मगरोड़ा में केवल एक या दो अध्यापिकाएं मौजूद मिलीं, जबकि अन्य शिक्षक अनुपस्थित पाए गए।
कुछ स्कूलों में नियमित मिला शिक्षण कार्य
निरीक्षण के दौरान सभी स्कूलों की स्थिति एक जैसी नहीं थी। फतेहगढ़ माध्यमिक विद्यालय और सीएम राइज विद्यालय फतेहगढ़ खुले मिले, जहां निर्धारित समय के अनुसार नियमित रूप से पढ़ाई संचालित होती पाई गई। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि यदि निगरानी और जिम्मेदारी तय हो तो सरकारी स्कूलों में बेहतर व्यवस्था संभव है।
शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि जब विद्यालयों का समय पहले से तय है, तब भी कई स्कूल समय पर क्यों नहीं खुल रहे? क्या अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण नहीं किया जा रहा, या फिर लापरवाह कर्मचारियों पर कार्रवाई का डर खत्म हो चुका है?
अभिभावकों में बढ़ी नाराजगी
स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि सरकारी स्कूलों की ऐसी लापरवाही का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है। सरकार शिक्षा सुधार के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर यदि स्कूल ही समय पर नहीं खुलेंगे तो शिक्षा की गुणवत्ता कैसे सुधरेगी।
विभागीय कार्रवाई पर टिकी निगाहें
अब सभी की नजर शिक्षा विभाग पर है। देखना होगा कि निरीक्षण में सामने आई अनियमितताओं को लेकर विभाग क्या कार्रवाई करता है और बंद मिले विद्यालयों तथा अनुपस्थित शिक्षकों के खिलाफ जवाबदेही कब तय की जाती है। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार के दावों पर सवाल उठना तय माना जा रहा है।
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