गुना में गेहूं बेचने पहुंचे हजारों किसानों को मंडी की अव्यवस्थाओं के चलते दशहरा मैदान में शिफ्ट कर दिया गया है। यहां न पीने के पानी की व्यवस्था है और न ही कोई छत, जिससे किसान कड़ी धूप में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। हालात ऐसे हैं कि किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के नीचे लेटकर समय गुजार रहे हैं।
धूप, भूख और इंतजार—महिला किसान की पीड़ा
एक महिला किसान ने बताया कि वह पिछले दो दिनों से मैदान में अपने बच्चों के साथ पड़ी है। धूप से बचने के लिए ट्रॉली को ही छत बनाना पड़ा।
“न ठीक से खाना है, न पानी… पता नहीं फसल की तुलाई कब होगी,”—यह दर्द कई किसानों की हालत बयां करता है।
रेट में गिरावट से बढ़ा आक्रोश
किसानों का आरोप है कि पहले गेहूं की खरीदी 3200 रुपए प्रति क्विंटल तक हुई, लेकिन अब व्यापारियों के दबाव में दर घटाकर 2200 रुपए प्रति क्विंटल कर दी गई है, जो कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP 2675 रुपए) से भी कम है। इससे किसानों में भारी नाराजगी है।
चक्काजाम के बाद बिगड़े हालात
अव्यवस्थाओं और कम कीमत के विरोध में किसानों ने सड़क पर उतरकर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शन की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला और पुलिस मौके पर पहुंची।
तहसीलदार और पुलिस पर धक्कामुक्की के आरोप
प्रदर्शन के दौरान हालात तब बिगड़ गए जब प्रोटोकॉल तहसीलदार गौरीशंकर बैरवा ने कथित तौर पर आपा खोते हुए किसानों को धक्का देना शुरू कर दिया। इसके बाद ट्रैफिक टीआई अजय कुशवाह भी आक्रामक हो गए और किसानों को धकियाते हुए प्रदर्शन खत्म कराया गया।
इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मंडी प्रबंधन का पक्ष
मंडी प्रबंधन का कहना है कि गुना में इस समय बड़ी संख्या में किसान अपनी फसल लेकर पहुंच रहे हैं, जिससे दबाव बढ़ गया है। किसानों को अस्थायी रूप से दशहरा मैदान में रखा गया है और जल्द ही तुलाई की व्यवस्था करने का दावा किया गया है।
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