Bhopal: सरकार जब कोई आयोजन करती है तो निश्चित ही उसका आयोजन प्रदेश की भलाई के लिए होता है, भले ही उसके परिणाम देर से आते हों... मगर आयोजन की तैयारी में लगे अफसरानों की पौ बारह हो जाती है... आयोजन सफल हो या ना हो, कमीशनखोरी का धंधा तो चोखा ही रहेगा... कुछ ऐसा ही हुआ है पिछले साल हुए ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में.... जिसमें भोपाल नगर निगम में पदस्थ कुछ हुक्मरानों ने करोड़ों का वारा-न्यारा कर दिया.. यद्यपि इसमें हुए भ्रष्टाचार की चिंगारी तो काफी पहले से सुलग रही थी, मगर सत्ता के गलियारे में उसकी आंच अब आना शुरू हुई है... हालांकि आयोजन में हुए खेला की लोकायुक्त में मय सबूत के पहले ही शिकायत दर्ज करा दी गई थी, लेकिन उसकी जांच के आदेश अभी हुए हैं... आयुक्त नगरीय प्रशासन संकेत भोंडवे के हस्ताक्षर से निकाले गए आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेखित किया गया है कि फरवरी 2025 में ग्लोबल इन्वेस्टर समिट यानी जी.आई.एस. के आयोजन के दौरान नगर पालिक निगम भोपाल के अधिकारियों द्वारा शहर में कराए गए सौंदर्यीकरण कार्य में की गई अनियमितताओं से संबंधित शिकायत बिंदुओं पर विस्तृत जांच कराए जाने हेतु तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है... जी हां, आपके संज्ञान में यह भी ला देता हूं कि आदेश की यह कॉपी स्वराज एक्सप्रेस के पास उपलब्ध है... इस समिति में अपर आयुक्त नगर निगम भोपाल, जो आईएएस अधिकारी हैं, श्रीमती अंजू अरुण कुमार को अध्यक्ष बनाया गया है, उनके साथ मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के प्रमुख अभियंता आनंद सिंह और वित्तीय अधिकारी सौरभ तिवारी जांच समिति के सदस्य हैं... इस तीन सदस्यीय समिति को यह भी निर्देशित किया गया है कि वह सभी बिंदुओं पर गहन जांच कर 15 दिवस के अंदर आयुक्त के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत करें... आदेश 1 अप्रैल 2026 को निकाला गया है और उसकी कॉपी सभी सदस्यों को दूसरे दिन उपलब्ध करा दी गई है... आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इस जीआईएस के आयोजन में अकेले भोपाल नगर निगम ने लगभग 65 करोड़ रुपये खर्च किए हैं... जिसमें 35 करोड़ तो समिट के आयोजन से पहले ही एडवांस में दे दिए गए थे.... अब जरा सोचिए कि शहर के सौंदर्यीकरण पर ही लगभग 35 करोड़ रुपये का वारा-न्यारा हो गया, जिसमें खास बात यह है कि यह सौंदर्यीकरण अस्थायी था... यानी दो दिवसीय ग्लोबल इन्वेस्टर समिट समाप्त तो सौंदर्यीकरण भी विलुप्त... अब आपको बताते हैं कि इस जांच के घेरे में कौन आ रहे हैं... तो मौजूदा समय में पदस्थ तीन इंजीनियर और तीन अन्य कर्मचारियों पर जांच की गाज तो गिर ही रही है, साथ में तत्कालीन नगर निगम कमिश्नर हरेन्द्र नारायण सिंह और तत्कालीन अपर आयुक्त निधि सिंह भी जांच के घेरे में आ रहे हैं.. हरेन्द्र नारायण इस समय छिंदवाड़ा कलेक्टर हैं, तो निधि सिंह अतिरिक्त लेबर कमिश्नर इंदौर में पदस्थ हैं.... यहां सबसे गंभीर पहलू यह है कि यह मुख्यमंत्री का सपना है कि प्रदेश में ज्यादा से ज्यादा उद्योग स्थापित हों, जिससे प्रदेश का विकास भी हो और रोजगार के माध्यम भी बढ़ें... ऐसे में इस आयोजन में ही भ्रष्टाचार जैसे शब्द का समावेश भी हो, यह बात सीएम को भी नागवार गुजरी है... इसीलिए सीएम चाहते हैं कि पूरे मामले की गहन और निष्पक्ष जांच हो... खैर, अब आगे देखना यह है कि जांच रिपोर्ट में क्या आता है और उस पर किस तरह की और कब तक कार्रवाई होती है।
G.I.S का मेला..निगम अधिकरियों ने किया सौंदर्यीकरण के नाम पर खेला
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