बाहर से बुलाए गए ‘मैनेजर’, अलग-अलग जिम्मेदारियां
सूत्रों के मुताबिक अवैध खनन के इस नेटवर्क को संभालने के लिए बाहरी जिलों से मैनेजर बुलाए गए हैं। मशीन संचालन के लिए अलग तकनीकी टीम तैनात है, जबकि ट्रैक्टरों की आवाजाही और लोडिंग के लिए अलग प्रबंधन किया गया है। इतना ही नहीं, यहां से निकाली जा रही रेत को चोरी-छिपे राजगढ़ जिले में स्टॉक किए जाने की भी बात सामने आई है।
आदेश जारी, लेकिन कार्रवाई नदारद
अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) राघौगढ़ द्वारा 18 फरवरी 2026 को आदेश जारी कर संयुक्त गश्ती दल का गठन किया गया था। इस दल में तहसीलदार, थाना प्रभारी, खनिज निरीक्षक और राजस्व अमला शामिल थे।
आदेश में रोजाना गश्त, अवैध उत्खनन पर कार्रवाई और मशीनरी जब्ती के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद स्थानीय लोगों का कहना है कि जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।
कानून का उल्लंघन, राजस्व को भारी नुकसान
यह पूरा मामला माइन्स एवं मिनरल्स एक्ट 1957 और मध्यप्रदेश गौण खनिज अधिनियम का सीधा उल्लंघन है। अवैध खनन के कारण शासन को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। साथ ही, पर्यावरणीय संतुलन और क्षेत्र की भौगोलिक संरचना पर भी गंभीर असर पड़ रहा है।
पार्वती नदी के अस्तित्व पर खतरा
रघुनाथपुरा क्षेत्र में पार्वती नदी के किनारे हो रहा लगातार अवैध उत्खनन नदी के प्राकृतिक स्वरूप को नुकसान पहुंचा रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि जल्द सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो नदी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है।
सबसे बड़ा सवाल: जिम्मेदार कौन?
इस पूरे मामले में कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं—
- जब खदान की कोई वैध लीज नहीं है, तो भारी मशीनें कैसे चल रही हैं?
- सैकड़ों ट्रैक्टरों की आवाजाही किसके संरक्षण में हो रही है?
- प्रशासनिक आदेशों के बावजूद कार्रवाई केवल कागजों तक क्यों सीमित है?
लोगों की मांग: तुरंत हो सख्त कार्रवाई
जागरूक नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि जिले के प्राकृतिक संसाधनों के इस अवैध दोहन पर तुरंत रोक लगाई जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
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