गुना। मध्य प्रदेश के गुना जिले के आदिवासी बाहुल्य बमोरी क्षेत्र में सरकारी स्कूलों की स्थिति चिंताजनक सामने आई है। औचक ग्राउंड पड़ताल में कई स्कूल बंद मिले, जबकि खुले स्कूलों में भी शिक्षक अनुपस्थित पाए गए। कुछ स्कूलों में तो छात्र ही नहीं पहुंचे। ऐसे में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था और डिजिटल अटेंडेंस जैसे दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सख्त आदेशों के बावजूद स्कूलों में लापरवाही
प्रदेश सरकार की ओर से शिक्षकों की डिजिटल अटेंडेंस अनिवार्य करने और 'नो वर्क, नो पे' जैसे निर्देश जारी किए गए हैं। इसके बावजूद बमोरी ब्लॉक के कपासी जन शिक्षा केंद्र अंतर्गत कई सरकारी स्कूलों में इन आदेशों का असर दिखाई नहीं दिया। ग्राउंड रिपोर्ट में स्कूल बंद मिले और कई जगह शिक्षक ड्यूटी से नदारद पाए गए।
कई स्कूलों में लटके मिले ताले
पड़ताल के दौरान बलखंडी, कुम्हारी, पाड़ोन, मिशलपुरा, माना और भगवानपुरा के सरकारी विद्यालय बंद मिले। स्कूलों के मुख्य द्वारों पर ताले लटके थे। निर्धारित समय पर भी विद्यालयों का बंद होना स्थानीय शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
खुले स्कूलों में भी नहीं दिखी पढ़ाई
जो स्कूल खुले मिले, वहां भी हालात संतोषजनक नहीं थे। बरबन एकीकृत माध्यमिक विद्यालय में तीन शिक्षक मौजूद थे, लेकिन एक शिक्षिका सरिता सिंह बिना सूचना के अनुपस्थित मिलीं। सबसे हैरानी की बात यह रही कि पूरे स्कूल में एक भी छात्र मौजूद नहीं था। खाली कक्षाएं और सूनी बेंचें सरकारी शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर बयां कर रही थीं।
एक और स्कूल में शिक्षक मिले गायब
बघुरिया माध्यमिक विद्यालय में शिक्षक पंकज वैष्णव अपनी ड्यूटी पर मौजूद थे, लेकिन दूसरे शिक्षक अखलेश नाथ विद्यालय में नहीं मिले। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या शिक्षकों की नियमित निगरानी प्रभावी ढंग से हो रही है।
आदिवासी क्षेत्र के बच्चों की शिक्षा पर संकट
कपासी जन शिक्षा केंद्र के अंतर्गत आने वाले अधिकांश गांव आदिवासी बाहुल्य हैं, जहां बच्चों की शिक्षा पूरी तरह सरकारी स्कूलों पर निर्भर है। ऐसे में स्कूलों का बंद रहना या शिक्षकों का अनुपस्थित रहना सीधे तौर पर बच्चों के भविष्य को प्रभावित कर रहा है।
डिजिटल अटेंडेंस व्यवस्था पर भी उठे सवाल
सरकार लगातार डिजिटल अटेंडेंस और ऑनलाइन निगरानी की बात करती रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर सामने आई तस्वीर इन दावों से मेल नहीं खाती। सवाल यह भी है कि यदि स्कूल बंद थे और शिक्षक अनुपस्थित थे, तो डिजिटल निगरानी व्यवस्था ने इस पर क्या कार्रवाई की।
अब जिम्मेदारों पर होगी कार्रवाई?
सरकारी स्कूलों की इस स्थिति के सामने आने के बाद अब निगाहें शिक्षा विभाग पर हैं। उम्मीद की जा रही है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा मामले की जांच कराई जाएगी और यदि लापरवाही की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार शिक्षकों एवं अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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