भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अब ट्रैफिक नियम तोड़ना और नो-पार्किंग में गाड़ी खड़ी करना भारी पड़ सकता है, क्योंकि भोपाल पुलिस अब आसमान से हाई-टेक कैमरों के जरिए नजर रख रही है। राज्य में अपनी तरह की इस पहली और अनोखी पहल में, ट्रैफिक पुलिस ने नो-पार्किंग जोन में अवैध रूप से वाहन खड़े करने वालों को पकड़ने और उनका चालान काटने के लिए 'ड्रोन-माउंटेड कैमरों' का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। इस आधुनिक मुहिम की औपचारिक शुरुआत सोमवार से कर दी गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य शहर को ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाना और सड़कों पर सुचारू यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
भारी ट्रैफिक और व्यस्ततम बाजारों पर पुलिस का सबसे ज्यादा फोकस
ट्रैफिक पुलिस की इस हाई-टेक मुहिम का सबसे ज्यादा ध्यान शहर के उन हिस्सों पर है जहाँ चौबीसों घंटे गाड़ियों का भारी दबाव रहता है। शुरुआती चरण में एमपी नगर (MP Nagar) और वीआईपी रोड (VIP Road) जैसे भारी भीड़भाड़ वाले और संकरे रास्तों पर ड्रोन उड़ाए जा रहे हैं। इन व्यावसायिक और व्यस्त इलाकों में लोग अक्सर सड़कों के किनारे गाड़ियाँ पार्क कर देते हैं, जिससे आने-जाने वाले राहगीरों और अन्य वाहनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। पुलिस अब इन जगहों पर ड्रोन की मदद से तुरंत एक्शन ले रही है।
नो-पार्किंग के कारण लगती है जाम, इन नए इलाकों में भी बढ़ी चौकसी
ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों और विश्लेषण के मुताबिक, भोपाल शहर की करीब एक-तिहाई सड़कों पर केवल अवैध रूप से पार्क किए गए वाहनों के कारण ही हमेशा जाम की स्थिति बनी रहती है। इसी गंभीर समस्या को देखते हुए अब ड्रोन सर्विलांस का दायरा तेजी से बढ़ा दिया गया है। एमपी नगर और वीआईपी रोड की सफलता के बाद अब बागसेवनिया, मिसरोद और नर्मदापुरम रोड के कुछ सबसे व्यस्त हिस्सों पर भी ड्रोन से पैनी नजर रखी जा रही है, ताकि सड़कों को अतिक्रमण मुक्त रखा जा सके।
दुर्घटना के दस्तावेज़ीकरण से लेकर सीधे ई-चालान जेनरेट करने तक का सफर
आपको बता दें कि इससे पहले इन ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल केवल बड़ी दुर्घटनाओं के स्थलों का दस्तावेज़ीकरण (डॉक्यूमेंटेशन) करने या मैपिंग के लिए किया जाता था। लेकिन अब तकनीक को अपग्रेड करते हुए इनका उपयोग सीधे ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों की पहचान के लिए हो रहा है। ये ड्रोन हवा में उड़ते हुए नो-पार्किंग में खड़े वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबर को बेहद साफ तरीके से स्कैन कर लेते हैं, जिसके बाद डेटा के आधार पर सीधे वाहन मालिक के नाम ई-चालान (E-Challan) जेनरेट कर दिया जाता है।
एक महीने के कड़े ट्रायल के बाद कंट्रोल रूम से शुरू हुई लाइव मॉनिटरिंग
अतिरिक्त आयुक्त मोनिका शुक्ला ने इस हाई-टेक व्यवस्था की जानकारी देते हुए बताया कि जमीनी स्तर पर औपचारिक चालान की कार्रवाई शुरू करने से पहले विभाग ने एक महीने तक इसका कड़ा और विस्तृत ट्रायल रन किया था। फिलहाल ट्रैफिक विभाग के पास दो बेहद आधुनिक ड्रोन हैं। पुलिस कमिश्नर संजय कुमार के अनुसार, इन ड्रोन से मिलने वाली हाई-डेफिनिशन लाइव फीड सीधे पुलिस कंट्रोल रूम को ट्रांसफर होती है, जहाँ तैनात टीम लगातार मॉनिटरिंग करती रहती है।
जाम से तुरंत राहत और सड़क इंजीनियरिंग की कमियां सुधारने में मिलेगी मदद
इस ड्रोन तकनीक का फायदा सिर्फ चालान काटने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके कई और दूरगामी लाभ हैं। लाइव फीड की मदद से अगर शहर के किसी भी कोने में अचानक जाम की स्थिति बनती है, तो कंट्रोल रूम से तुरंत नजदीकी पुलिस बल को मौके पर भेजा जा सकेगा। इसके साथ ही, ये ड्रोन कैमरे सड़कों पर टूटे हुए या क्षतिग्रस्त डिवाइडर जैसी सड़क इंजीनियरिंग (Road Engineering) की कमियों और गड्ढों को पहचानने में भी मदद करेंगे, ताकि उन्हें समय रहते सुधारा जा सके और हादसों को रोका जा सके।
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