Monday, 13 July 2026
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कर्णप्रयाग विवाद के बाद उत्तराखंड में हाई अलर्ट: पुलिस का सुरक्षा घेरा तोड़ देहरादून पहुंचे निहंग, रातभर चला सुरक्षा अभियान

 

देहरादून। उत्तराखंड के कर्णप्रयाग में हुए विवाद के बाद गुरुवार रात प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था अचानक सख्त करनी पड़ी। हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब से निकले निहंगों का एक जत्था पुलिस की बैरिकेडिंग और सुरक्षा घेरा पार कर उत्तराखंड में प्रवेश कर गया। इसके बाद राजधानी देहरादून में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया। जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देर रात तक खुद मोर्चे पर डटे रहे। हालांकि, निहंगों का कहना है कि उनका उद्देश्य कानून व्यवस्था बिगाड़ना नहीं, बल्कि अपने साथियों की रिहाई की मांग करना है।

सीमा पर पुलिस की तैयारी के बावजूद उत्तराखंड में दाखिल हुआ जत्था

जानकारी के अनुसार, पंजाब से आए निहंग पहले हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब गुरुद्वारे में रुके थे। प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने उनसे कई दौर की बातचीत की, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद निहंगों का जत्था कुल्हाल बॉर्डर की ओर बढ़ा। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन जत्था कथित तौर पर वैकल्पिक मार्गों से उत्तराखंड में प्रवेश करने में सफल रहा।

देहरादून में रातभर हाई अलर्ट, डीएम-एसएसपी ने संभाला मोर्चा

निहंगों के उत्तराखंड में प्रवेश की सूचना मिलते ही देहरादून में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। प्रेमनगर, शिमला बाईपास, आईएसबीटी और शहर के प्रमुख प्रवेश मार्गों पर भारी पुलिस बल और पीएसी की तैनाती की गई। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान और एसएसपी प्रमेन्द्र डोभाल देर रात तक स्वयं सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करते रहे। प्रेमनगर चौक को सील कर वाहनों की सघन जांच की गई, जिससे कई स्थानों पर लंबा जाम भी लग गया।

पुलिस को अन्य जत्थों के आने की भी आशंका

प्रशासन को आशंका थी कि निहंगों के अन्य जत्थे भी उत्तराखंड की ओर बढ़ सकते हैं। इसी वजह से पूरे देहरादून में हाई अलर्ट जारी रखा गया। पुलिस ने शहर के भीतर और सीमावर्ती क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर निगरानी बढ़ा दी।

आखिर क्या है पूरा विवाद?

पूरा मामला 16 जून को कर्णप्रयाग में हुई एक घटना से जुड़ा है। हेमकुंड साहिब की यात्रा पर जा रहे चार निहंगों का वाहन पार्किंग को लेकर एक स्थानीय होटल संचालक से विवाद हो गया था। आरोप है कि इस दौरान तलवार से हमला किया गया, जिसमें चार लोग घायल हुए। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर तीन निहंगों को गिरफ्तार कर लिया था, जबकि एक अन्य घायल हो गया था। इस घटना के विरोध में स्थानीय लोगों ने राजमार्ग पर जाम भी लगाया था।

नगरासू गुरुद्वारे में भी हुआ था गतिरोध

कर्णप्रयाग की घटना के कुछ दिन बाद रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू स्थित गुरुद्वारे में भी चार निहंग छत पर चढ़ गए थे। उनका आरोप था कि पुलिस ने कर्णप्रयाग मामले में एकतरफा कार्रवाई की है। बाद में पुलिस, प्रशासन और सिख प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के बाद 23 जून को यह गतिरोध शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हो गया और निहंग वहां से पंजाब लौट गए।

निहंगों की क्या है मांग?

कुल्हाल पहुंचे निहंगों ने कहा कि वे किसी तरह का संघर्ष नहीं चाहते और प्रेम व भाईचारा बनाए रखना चाहते हैं। उनका कहना है कि कर्णप्रयाग की घटना में दोनों पक्षों की गलती थी और मामले का समझौते के जरिए समाधान होना चाहिए। उन्होंने गिरफ्तार चार निहंगों को रिहा कर पंजाब भेजने की मांग की है। अधिकारियों ने वार्ता के दौरान उन्हें आश्वासन दिया कि गिरफ्तार आरोपियों की जमानत के लिए कानूनी प्रक्रिया चल रही है, लेकिन निहंगों का कहना है कि जब तक उनके साथी वापस नहीं मिलेंगे, वे लौटेंगे नहीं।

अब आगे क्या?

फिलहाल उत्तराखंड पुलिस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात हैं और सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है। प्रशासन का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है, जबकि पुलिस यह सुनिश्चित करने में जुटी है कि कानून व्यवस्था प्रभावित न हो। साथ ही, कर्णप्रयाग हिंसा मामले में दर्ज मुकदमे और गिरफ्तार आरोपियों से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है।

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