Monday, 13 July 2026
Swaraj Express
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मध्य प्रदेश

2 मंत्रियों के P.A की प्रेम कहानी ....दोनों हैं गजेटेड ऑफिसर

इश्क जब नया था तो इशारों में चला करता था...अब तो कहते हैं ज़मीं के नक्शों में मिला करता है।
स्वराज एक्सप्रेस ने पिछले दिनों एक मंत्राणी जी के पी.ए. साहब के सम्पत्ति के खेल का खुलासा किया था... जिसमें वो किस तरह मंत्राणी जी के प्रभार के जिले में अलग-अलग विभागों से उगाही कर रहे हैं.. प्रतिमाह प्रभारी मंत्री के दौरे के दो दिन पहले जिले में पहुंच जाते हैं और मंत्राणी के आने के पहले उगाही पूरी कर लेते हैं जिसकी शिकायत स्थानीय विधायक और सांसद ने भी मंत्राणी जी से की मगर उगाही का काम और भी तेजी से चलने लगा.. पहले पी.ए. साहब बैठक में उपस्थित नहीं रहते थे.. मगर अब वो बैठक में भी मंत्राणी के पीछे रखी कुर्सी की शोभा बढ़ाने लगे हैं.. मतलब साफ है कि कहीं न कहीं मंत्राणी जी की भी सहमति है.. स्थानीय कार्यकर्ता ही कहते हैं कि मंत्राणी जी के हर दौरे के पहले पीए साहब की जेब में 75 लाख से 1 करोड़ जाते हैं... मजेदार बात यह है कि कितनी उगाही हुई इसका पता जनाब मंत्राणी को भी नहीं होने देते... ऐसे में पीए साहब की जेब में पूरा पचास प्रतिशत कमीशन जाता है.. बेचारी मंत्राणी जी भी सम्पत्ति चाहती हैं पर सीधी हैं.. इसलिये चतुर सुजान पीए साहब की मौज है...खैर यह तो रहा पीए साहब का हर महीने होने वाली उगाही का किस्सा... अब कुरेदते हैं मंत्राणी के पीए की प्रेम कहानी को... तो पीए साहब की एक दिलरुबा भी है जो उनसे 16 साल छोटी है.. उनकी यह प्रेम कहानी मालवा के एक जिले से दस साल पहले शुरू हुई थी.. जब महोदय उस जिले में अध्ययन से जुड़े एक विभाग में कार्यरत थे... उसी विभाग में उनकी माशूका भी पदस्थ रही है... साहब लड़की के सीनियर थे इसलिए पीए साहब ने प्रेम का ऐसा दांव खेला कि वह उनके मोहजाल में फंस गई और फंसी तो ऐसे फंसी कि वो अभी तक अविवाहित है.. यानी उन्हीं को परमेश्वर समझ बैठी... जबकि पीए साहब की पत्नी भी है और बाल-बच्चे भी हैं....

यहां यह शेर याद आता है....पहले फाइलों में नाम मिला, फिर बातों में असर आया...जो रिश्ता दफ्तर से शुरू हुआ वो दिल में उतर आया....
अब यहां बात आती है घरवाली और बाहरवाली की तो... घरवाली को खुश रखना उनकी जिम्मेदारी है मगर सामाजिक मर्यादाओं के बीच बाहरवाली को कैसे खुश रखें तो जनाब के पास इस अर्थयुग (मान्यता भी है कि यह कलयुग नहीं, अर्थयुग है) में अर्थरूपी तुरुप का इक्का है... पहले भी एक बुन्देलखण्ड से जुड़े मंत्री के पीए रहे तो वहां भी धन उगाही के सर्वेसर्वा थे और अब मंत्राणी जी के लिये लक्ष्मीपति बने हुए हैं.. यद्यपि पूर्व मंत्री जी अब उनके नाम का रोना कई लोगों से रो चुके हैं.. क्योंकि जब विधानसभा चुनाव की तिथि आई तो पीए साहब ने मंत्री जी को ही लंबा चूना लगाकर चलते बने.. मंत्री जी किस्मत के भी मारे रहे, मोहन सरकार में विधायक रहते हुए भी पूर्व मंत्री हो गये..खैर पीए साहब प्रेमिका की हर ख्वाहिश तो पूरी करते ही हैं.. साथ ही उसके भविष्य की चिंता भी उनको सताती है.... वो कैसे, तो किस्सा कोताही का यह है कि उन्होंने पिछले दो साल में माशूका को भोपाल में ही दो फार्म हाउस प्रेजेंट किये हैं... एक फार्म हाउस दो साल पहले तो दूसरा इसी साल... हालांकि उनकी माशूका भी एक मंत्री के यहां ही डेपुटेशन पर विराजमान है लेकिन उनके यहां लेन-देन वाला मामला उनके पास नहीं है... फिर बेचारी की शानो-शौकत सिर्फ तनख्वाह में कैसे पूरी होगी.. तो परमेश्वर बन चले लक्ष्मीपति का बाहरवाली को सन्तुष्ट रखने का फर्ज बनता है..अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये रासलीला रचाने वाले पीए कौन हैं तो... चलते-चलते इतना जरूर इशारा कर देते हैं कि पीए साहब के मंत्राणी जी जिस जिले की प्रभारी हैं उस जिले में एक बड़े उद्योगपति का बड़ा प्लांट चल रहा है.. और प्रेमिका को गिफ्ट करने वाले फार्म हाउस भी भोपाल से सटी सीमा में हैं.अन्त मे अर्ज है...
मोहब्बत भी अजीब शै है, हिसाबों से नहीं चलती.....
मगर जब दौलत साथ हो तो चर्चा दूर तक चलती

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