गुना ।रिपोर्ट मनोहर प्रजापति। गुना के डासना देवी मंदिर के महंत और हिंदुत्ववादी नेता महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद सरस्वती एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में आ गए हैं। गुना प्रवास के दौरान पंचमुखी हनुमान मंदिर पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि अगर हिंदुओं को अपना अस्तित्व बचाना है, तो उन्हें तालिबान और आईएसआईएस के पैटर्न पर अपनी “सेना” तैयार करनी होगी। इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
संघ और बजरंग दल पर तीखा हमला
नरसिंहानंद ने अपने बयान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और बजरंग दल जैसे संगठनों पर भी निशाना साधा। उन्होंने इन संगठनों को “समलैंगिकों का संगठन” बताते हुए कहा कि इनके भरोसे सनातन धर्म का बचना संभव नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई संगठन केवल सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं और वास्तविक काम के बजाय “ड्रामा” करते हैं।
कट्टरता और ‘बलिदान’ की बात
महामंडलेश्वर ने कहा कि जिस तरह तालिबान और आईएसआईएस अपने धर्म के लिए कट्टरता दिखाते हैं, वैसी ही कार्यप्रणाली अपनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अब केवल बलिदान से ही धर्म की रक्षा संभव है और “फालतू सेनाओं” का समर्थन नहीं किया जाएगा।
कानून और यूजीसी पर भी सवाल
अपने बयान में उन्होंने देश के कानूनों और यूजीसी पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि भारत में कानून भेदभाव मिटाने के बजाय हिंदुओं को आपस में लड़ाने के लिए बनाए जाते हैं। उन्होंने लोगों से ऐसी सरकारों का विरोध करने की अपील की, जो उनके अनुसार सनातन के खिलाफ “काले कानून” लाती हैं।
सामाजिक टिप्पणियों पर बढ़ा विवाद
नरसिंहानंद ने गुना में हुए दुष्कर्म मामले का जिक्र करते हुए इसे “कमजोरी का परिणाम” बताया। साथ ही उन्होंने मुस्लिम समुदाय को लेकर भी विवादित टिप्पणियां कीं और हिंदू युवतियों को उनसे दूरी बनाने की सलाह दी। उनके इन बयानों को लेकर आलोचना तेज हो गई है।
भारत के भविष्य को लेकर जताई चिंता
उन्होंने दावा किया कि जनसंख्या असंतुलन की वजह से भविष्य में हिंदू समाज खतरे में पड़ सकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत अगर विश्वगुरु बना भी, तो वह “सनातन भारत” नहीं बल्कि “मुस्लिम भारत” होगा। उन्होंने धर्मगुरुओं पर भी आरोप लगाया कि वे लोगों को भ्रमित कर रहे हैं।
Comments
Leave a Reply