जबलपुर। जापान के मशहूर मियाज़ाकी आम को लेकर अक्सर दावा किया जाता है कि इसकी कीमत ₹2.5 लाख प्रति किलो तक होती है। सोशल मीडिया और कई खबरों में इसे दुनिया का सबसे महंगा आम बताया जाता है। लेकिन मध्यप्रदेश के जबलपुर के किसान संकल्प सिंह परिहार, जिन्होंने इस आम की खेती से देशभर में पहचान बनाई, का कहना है कि यह दावा पूरी तरह सही नहीं है। उनके अनुसार भारत में मियाज़ाकी आम लाखों रुपये किलो नहीं, बल्कि लगभग ₹15,000 प्रति किलो तक बिकता है।
जबलपुर से शुरू हुई मियाज़ाकी आम की चर्चा
करीब पांच साल पहले जबलपुर के किसान संकल्प सिंह परिहार अपने बाग में उगाए गए जापानी मियाज़ाकी आमों के कारण चर्चा में आए थे। उनका कहना है कि लोग इस आम को उसकी कीमत के कारण जानते हैं, लेकिन उनके लिए इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका स्वाद है। उनके अनुसार यह आम इतना मीठा और स्वादिष्ट होता है कि इसका छिलका तक खाने का मन करता है।
₹2.5 लाख नहीं, सिर्फ ₹15 हजार किलो में बिक रहा आम
परिहार के पास मियाज़ाकी के पांच पेड़ हैं, लेकिन उनका कहना है कि उन्हें आज तक इस आम के लिए ₹2.5 लाख प्रति किलो की कीमत नहीं मिली। फिलहाल वे इसे भारतीय बाजार में करीब ₹15,000 प्रति किलो बेचते हैं। पहले इसकी कीमत अधिक थी, लेकिन समय के साथ इसमें कमी आई है।
कैसे शुरू हुई मियाज़ाकी की खेती?
संकल्प सिंह परिहार ने बताया कि करीब सात साल पहले चेन्नई की यात्रा के दौरान ट्रेन में एक व्यक्ति से उनकी मुलाकात हुई, जिसने उन्हें जापान के इस दुर्लभ आम के बारे में बताया। इसके बाद उन्होंने मियाज़ाकी के पौधे खरीदे। शुरुआती दस पौधों में से केवल तीन ही बच पाए, लेकिन बाद में उन्होंने इनसे नए पौधे तैयार किए और आज उनके पास पांच फल देने वाले पेड़ हैं।
बाग की सुरक्षा में 18 गार्ड डॉग और CCTV
मियाज़ाकी आम की बढ़ती लोकप्रियता के बाद चोरी की घटनाओं की आशंका को देखते हुए परिहार ने अपने बाग में 18 गार्ड डॉग और चौबीसों घंटे सीसीटीवी निगरानी की व्यवस्था की है। उनका कहना है कि कई बार लोग इन महंगे आमों को चोरी करने की कोशिश भी करते हैं।
24 किस्मों के आम उगाते हैं किसान
जबलपुर के चारगवां स्थित लगभग 15 एकड़ के बाग में संकल्प सिंह परिहार भारतीय और विदेशी मिलाकर 24 किस्मों के आम उगाते हैं। उनके बाग में करीब 3,600 पेड़ हैं, जिनमें लगभग 200 पेड़ विदेशी प्रजातियों के हैं। हर साल उनके बाग से सैकड़ों टन आम का उत्पादन होता है।
आखिर ₹2.5 लाख वाली कीमत का सच क्या है?
विशेषज्ञों के अनुसार ₹2.5 लाख प्रति किलो की चर्चा वास्तव में जापान की प्रीमियम नीलामी से जुड़ी है। जापान में उच्च गुणवत्ता वाले मियाज़ाकी आमों की एक जोड़ी विशेष नीलामी में हजारों डॉलर में बिकती है। इसी कीमत को भारतीय रुपये में बदलकर कई जगह यह प्रचारित कर दिया गया कि भारत में भी यही आम लाखों रुपये प्रति किलो बिकता है, जबकि वास्तविकता इससे अलग है।
बागवानी विभाग ने भी जताई राय
जबलपुर के उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मियाज़ाकी आम को लेकर काफी हद तक आकर्षण उसकी छवि और प्रचार के कारण बना है। उनका मानना है कि स्वाद के मामले में भारत की कई पारंपरिक किस्में भी किसी से कम नहीं हैं।
दिखावे और उपहार का प्रतीक बन चुका है मियाज़ाकी
किसानों के अनुसार भारत में मियाज़ाकी आम को स्वाद से ज्यादा उसकी दुर्लभता और प्रीमियम पहचान के कारण खरीदा जाता है। कई संपन्न लोग इसे विशेष गिफ्ट बॉक्स में पैक कर उपहार के रूप में खरीदते हैं। यही वजह है कि इसकी मांग सीमित होने के बावजूद यह आम चर्चा में बना रहता है।
बढ़ रही खेती, घट सकती है कीमत
देश के कई राज्यों में अब किसान मियाज़ाकी आम की खेती शुरू कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे इसका उत्पादन बढ़ेगा, इसकी कीमतों में और कमी आ सकती है। संकल्प सिंह परिहार भी मानते हैं कि आने वाले समय में यह आम पहले की तुलना में अधिक लोगों की पहुंच में होगा और इसकी विशिष्टता धीरे-धीरे कम हो सकती है।
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