Thursday, 27 August 2026
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संसद का मानसून सत्र समाप्त, 12 विधेयक पास लेकिन हंगामे के बीच बहस पर उठे सवाल

 

नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र गुरुवार, 13 अगस्त को लोकसभा और राज्यसभा के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के साथ समाप्त हो गया। सत्र के दौरान विपक्ष के लगातार विरोध और हंगामे के बीच कई विधेयक पारित किए गए। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सत्र को विधायी कामकाज के लिहाज से “बहुत सफल” बताया और कहा कि कुल 12 विधेयक पारित किए गए। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि बहस और चर्चा के लिहाज से सत्र उतना सफल नहीं रहा।

लोकसभा में सत्र की शुरुआत और आखिरी दिन भी विपक्ष के विरोध के बीच हुई। अंतिम दिन राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के पूर्ण गायन के बाद लोकसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में मौजूद रहे।

संसदीय कार्य मंत्री के मुताबिक, लोकसभा में उपलब्ध कुल समय की तुलना में उत्पादकता केवल 19 प्रतिशत रही, जबकि राज्यसभा की उत्पादकता 39 प्रतिशत रही। यानी विधायी कामकाज तो हुआ, लेकिन सदन में चर्चा और सामान्य संसदीय गतिविधियों के लिए उपलब्ध समय का बड़ा हिस्सा हंगामे और व्यवधान में चला गया।

राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी सत्र के दौरान लगातार व्यवधान पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि उच्च सदन कुल 37 घंटे 49 मिनट तक चला। उनके अनुसार, बार-बार होने वाले व्यवधान से जनता के विश्वास पर असर पड़ता है और सांसदों को संसदीय आचरण बनाए रखने की जरूरत है।

NEET पेपर लीक और छात्रों के प्रदर्शन पर टकराव

सत्र के दौरान NEET पेपर लीक के मुद्दे पर छात्रों के प्रदर्शन को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिली। गृह मंत्री अमित शाह ने 12 अगस्त को छात्रों के प्रदर्शन पर पूर्ण चर्चा के लिए अपनी सहमति जताई थी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी इस मुद्दे पर चर्चा के लिए समय बढ़ाने की बात कही थी। हालांकि, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि युवाओं को भाषण नहीं, बल्कि यह जवाब चाहिए कि प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने और पुलिस कार्रवाई का आदेश किसने दिया था।

खड़गे ने सरकार पर साधा निशाना

सत्र समाप्त होने के बाद राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सदन को ठीक से नहीं चलने देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार लोकतंत्र को कमजोर करना चाहती है और संसद सदस्यों का मनोबल गिराना चाहती है।

वहीं कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने भी सत्र को निराशाजनक बताया। उनका आरोप था कि कई विधेयक बिना पर्याप्त चर्चा के पारित किए गए और विपक्ष को अपनी बात रखने के लिए पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।

खनन विधेयक पर भी हंगामा

सत्र के अंतिम दिन राज्यसभा ने Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2026 पर चर्चा के बाद इसे पारित कर दिया। इससे एक दिन पहले लोकसभा ने इस विधेयक को बिना बहस के वॉइस वोट से पारित किया था। राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान भी विपक्षी सांसदों की नारेबाजी जारी रही।

इसके अलावा, राज्यसभा ने केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने और नेशनल को-ऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन से जुड़े विधेयकों को भी पारित किया।

FCRA बिल JPC को भेजा गया

विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम यानी FCRA में संशोधन से जुड़े विधेयक को लेकर भी सरकार को विपक्ष और अल्पसंख्यक संगठनों की ओर से विरोध का सामना करना पड़ा। 12 अगस्त को लोकसभा में विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC के पास भेजने का प्रस्ताव पारित हुआ। इससे इस विवादित विधेयक की आगे और जांच का रास्ता खुल गया।

कुल मिलाकर, मानसून सत्र में सरकार ने विधायी कामकाज के आंकड़ों को अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश किया, जबकि विपक्ष ने चर्चा के कम समय और लगातार व्यवधान को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। सत्र के अंत में दोनों पक्षों के दावों ने एक बार फिर संसद में कानून बनाने के साथ-साथ सार्थक बहस और विपक्ष की भागीदारी को लेकर बहस छेड़ दी है।

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