Monday, 13 July 2026
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ओमान हमले में जान गंवाने वाले तीन भारतीय नाविकों की दर्दनाक कहानी, आखिरी कॉल में परिवार से कहा था- ‘जल्द लौटूंगा’

नई दिल्ली। ओमान तट के पास अमेरिकी हमले में पलाऊ के झंडे वाले तेल टैंकर एमटी सेटेबेलो पर जान गंवाने वाले तीन भारतीय नाविकों की कहानी सामने आने के बाद पूरे देश में शोक की लहर है। हादसे में डेक कैडेट आदित्य शर्मा, चीफ इंजीनियर सुरेश पटनाला और इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया की मौत हो गई। तीनों अपने परिवारों के लिए बेहतर भविष्य बनाने के सपने लेकर समुद्र में निकले थे, लेकिन अब उनके घर सिर्फ आखिरी फोन कॉल की यादें बची हैं।

आखिरी कॉल में आदित्य ने बताई थी बढ़ते खतरे की बात

हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर निवासी 23 वर्षीय आदित्य शर्मा ने हमले से कुछ दिन पहले अपने पिता राजेश शर्मा से व्हाट्सएप कॉल पर बातचीत की थी। उन्होंने बताया था कि अमेरिकी नौसेना की ओर से जहाज को कई बार चेतावनी दी गई है और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। इसके बावजूद उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया था कि सब कुछ ठीक हो जाएगा।

पहला समुद्री सफर ही बन गया आखिरी

आदित्य शर्मा नवंबर 2025 में डेक कैडेट के रूप में अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय तैनाती पर गए थे। उन्होंने पंजाब और चेन्नई में पढ़ाई करने के बाद स्कॉटलैंड से एडवांस डिप्लोमा इन नॉटिकल साइंस किया था। परिवार के अनुसार वह मई में घर लौटने वाले थे, लेकिन कुछ समय और काम करने के लिए जहाज पर ही रुक गए थे।

पिता ने पूछा- आखिर बेटे को बचाने की कोशिश कितनी हुई?

आदित्य के पिता ने कहा कि वह जानना चाहते हैं कि उनके बेटे के अंतिम क्षण कैसे थे और उसे बचाने के लिए क्या प्रयास किए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जहाज को पहले से चेतावनियां मिल रही थीं, तब चालक दल की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम क्यों नहीं उठाए गए।

सुरेश पटनाला की आखिरी बात- ‘मैं सावधान हूं’

आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम निवासी चीफ इंजीनियर सुरेश पटनाला ने हमले वाले दिन अपनी पत्नी भार्गवी से आखिरी बार बात की थी। पत्नी ने उनसे सावधान रहने को कहा था, जिस पर उन्होंने जवाब दिया था कि वह पूरी तरह सतर्क हैं। दो दिन बाद परिवार को उनके लापता होने और फिर मौत की पुष्टि की खबर मिली।

परिवार के सपने एक झटके में टूट गए

सुरेश पटनाला पिछले 15 वर्षों से मरीन इंजीनियर के रूप में काम कर रहे थे। वह पांच महीने से अधिक समय समुद्र में बिताने के बाद छुट्टी लेकर 24 जून को अपनी 15वीं शादी की सालगिरह परिवार के साथ मनाने घर आने वाले थे। उनकी पत्नी ने कहा कि अब उनके दोनों बच्चों का भविष्य सबसे बड़ी चिंता बन गया है।

शिवानंद ने पत्नी से कहा था- ‘जल्द घर लौटूंगा’

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रहने वाले शिवानंद चौरसिया ने हमले से दो दिन पहले अपनी पत्नी और बच्चों से फोन पर बात की थी। उन्होंने भरोसा दिलाया था कि वह जल्द घर लौटेंगे। लेकिन इसके कुछ ही समय बाद परिवार को उनके लापता होने और फिर मौत की सूचना मिली।

बेहतर भविष्य के लिए चुनी थी समुद्री नौकरी

शिवानंद पहले पुणे में वेल्डिंग का काम करते थे। बेहतर आमदनी के लिए उन्होंने तेल टैंकर पर इंजन फिटर की नौकरी स्वीकार की थी। परिवार का कहना है कि वह अपने छोटे भाई को भी दुबई में नौकरी दिलाने में मदद कर चुके थे और पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने का सपना देख रहे थे।

सरकार से शव जल्द भारत लाने की मांग

तीनों नाविकों के परिवारों ने केंद्र सरकार से उनके पार्थिव शरीर जल्द भारत लाने और पूरी घटना की निष्पक्ष जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है। परिजनों का कहना है कि उन्हें अब तक यह नहीं बताया गया कि हादसे के दौरान आखिर क्या हुआ था।

तीन परिवारों का सहारा छिन गया

इस हादसे ने तीन अलग-अलग राज्यों के परिवारों को गहरे दुख में डुबो दिया है। कहीं छोटे बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया तो कहीं बुजुर्ग माता-पिता ने अपना इकलौता सहारा खो दिया। परिवारों का कहना है कि अब उन्हें सिर्फ अपने प्रियजनों के पार्थिव शरीर और इस हादसे की सच्चाई का इंतजार है।

खाड़ी क्षेत्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर उठे सवाल

ओमान की खाड़ी में लगातार भारतीय चालक दल वाले जहाजों पर हो रहे हमलों ने समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।

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