नई दिल्ली: पार्लियामेंट्री कमेटी ने मेटा को 3 दिन का अल्टीमेटम, कहा- PM मोदी का वीडियो हटाने पर जुकरबर्ग मांगें माफी, नहीं तो हटेगा 'सेफ हार्बर' नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 23 जुलाई का वीडियो फेसबुक से कुछ समय के लिए हटाए जाने के मामले ने अब राजनीतिक और कानूनी रूप ले लिया है। संसद की संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति ने मेटा (Meta) के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को तीन दिन के भीतर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने का अल्टीमेटम दिया है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को मिलने वाला 'सेफ हार्बर' संरक्षण हटाने की सिफारिश की जाएगी, जिससे कंपनी और उसके अधिकारियों के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज की जा सकेगी। समिति के अध्यक्ष और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि प्रधानमंत्री देश के 140 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनका वीडियो हटाया जाना लोकतंत्र पर हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि मेटा 'सेफ हार्बर' जैसी कानूनी सुविधा का दुरुपयोग कर रहा है। समिति ने सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर कहा है कि यह मामला किसी इंटरमीडियरी की सामान्य जिम्मेदारी का नहीं बल्कि एक प्रकाशक (Publisher) की भूमिका से जुड़ा है। निशिकांत दुबे ने कहा कि यदि मार्क जुकरबर्ग तीन दिनों के भीतर माफी नहीं मांगते हैं तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को मिलने वाला 'सेफ हार्बर' संरक्षण हटाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रभावित लोग मेटा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराते हैं तो देशभर में बड़ी संख्या में कानूनी मामले सामने आ सकते हैं। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जुलाई को इंस्टाग्राम पर अपना पहला सेल्फी वीडियो साझा किया था, जिसमें उन्होंने छात्रों को पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया था। यही वीडियो बाद में फेसबुक पर भी पोस्ट किया गया, लेकिन कुछ समय के लिए उसे मेटा की ओर से प्रतिबंधित कर दिया गया। विरोध बढ़ने के बाद कंपनी ने वीडियो दोबारा बहाल कर दिया। हाल ही में संसदीय समिति की बैठक में मेटा के अधिकारियों से इस मुद्दे पर जवाब मांगा गया था। कंपनी ने इसे तकनीकी गड़बड़ी बताते हुए खेद जताया, लेकिन सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इस स्पष्टीकरण को संतोषजनक नहीं माना। मंत्रालय का कहना था कि यदि यह वास्तव में तकनीकी समस्या थी तो मेटा जैसी बड़ी तकनीकी कंपनी को अपने सिस्टम को और बेहतर बनाना चाहिए। इसी बैठक में समिति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया। समिति ने गूगल, यूट्यूब, एक्स, फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और स्नैपचैट सहित सभी प्रमुख प्लेटफॉर्म को नियमों का सख्ती से पालन करने की चेतावनी दी है। समिति ने कहा कि यदि CSAM से जुड़े नियमों का उल्लंघन हुआ तो संबंधित कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में बच्चों के खिलाफ दर्ज 1,238 साइबर अपराध मामलों में से 1,099 मामले बच्चों से जुड़ी अश्लील या यौन शोषण सामग्री के प्रकाशन अथवा प्रसारण से संबंधित थे। वहीं, बच्चों के खिलाफ कुल अपराधों में 5.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और वर्ष 2020 की तुलना में ऐसे मामलों में लगभग 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। निशिकांत दुबे ने कहा कि बाल यौन शोषण सामग्री, महिलाओं के अश्लील चित्रण और एआई से बनाए गए फर्जी अश्लील वीडियो जैसे मामलों पर किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा राष्ट्रीय विषय है।
पार्लियामेंट्री कमेटी ने मेटा को 3 दिन का अल्टीमेटम, कहा- PM मोदी का वीडियो हटाने पर जुकरबर्ग मांगें माफी, नहीं तो हटेगा 'सेफ हार्बर'
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