दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों में एक हाथी को चमकीले गुलाबी रंग में रंगकर उसके साथ मॉडल का फोटोशूट किया गया, जिसके बाद लोगों ने इसे “कला” नहीं बल्कि “पशु शोषण” करार दिया।
फोटोग्राफर का दावा: ‘सुरक्षित रंग, सांस्कृतिक प्रेरणा’
इस फोटोशूट को रूस की ट्रैवल फोटोग्राफर जूलिया बुरुलेवा ने किया। उनका कहना है कि जयपुर की “पिंक सिटी” पहचान से प्रेरित होकर यह कॉन्सेप्ट तैयार किया गया। उन्होंने दावा किया कि हाथी पर लगाया गया रंग ऑर्गेनिक और पारंपरिक था, जैसा त्योहारों में इस्तेमाल होता है, और इससे जानवर को कोई नुकसान नहीं हुआ।
पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का विरोध
हालांकि, इस दावे के बावजूद पशु अधिकार संगठनों और आम लोगों ने कड़ी आपत्ति जताई। आलोचकों का कहना है कि किसी भी जीवित जानवर को केवल सौंदर्य या सोशल मीडिया कंटेंट के लिए रंगना और इस्तेमाल करना अनैतिक है। कई यूज़र्स ने इसे “एनिमल एब्यूज़” और “संस्कृति का गलत प्रदर्शन” बताया।
सरकारी जांच शुरू, नियमों पर सवाल
विवाद बढ़ने के बाद राजस्थान वन विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारी यह जांच कर रहे हैं कि फोटोशूट के लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं और क्या पशु कल्याण नियमों का पालन हुआ।
संस्कृति बनाम क्रिएटिविटी की बहस
यह मामला अब कला और नैतिकता के बीच टकराव का उदाहरण बन गया है। एक तरफ इसे पर्यटन और क्रिएटिव एक्सप्रेशन बताया जा रहा है, तो दूसरी ओर इसे परंपरा और पशु अधिकारों के खिलाफ बताया जा रहा है।
राजनीतिक रंग भी लेने लगा मुद्दा
सोशल मीडिया पर बढ़ते दबाव और जनभावनाओं के चलते यह विवाद अब राजनीतिक बहस का रूप ले रहा है। सरकारी संसाधनों के उपयोग, पर्यटन नीतियों और पशु संरक्षण कानूनों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
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