दिल्ली के लाल किले पर हुए धमाके के मामले में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। चार्जशीट के अनुसार, इस हमले के आरोपी जसीर बिलाल वानी ने बम बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और यूट्यूब जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का सहारा लिया था। यह मामला 'हाइब्रिड टेररिज्म' के बढ़ते खतरे की ओर इशारा करता है, जहां सामान्य तकनीक का इस्तेमाल खूंखार साजिशों को अंजाम देने के लिए किया जा रहा है।
AI और यूट्यूब से सीखी बम बनाने की तकनीक
जांच में सामने आया है कि आरोपी जसीर बिलाल वानी ने बम के डिजाइन, रॉकेट टेक्नोलॉजी और विस्फोटक मिश्रण के लिए सही रसायनों के अनुपात को समझने के लिए ChatGPT और यूट्यूब का इस्तेमाल किया था। जसीर को 'अल-गजवा-उल-हिंद' (AGuH) मॉड्यूल का मुख्य 'IED इंजीनियर' माना जा रहा है, जिसने इस हमले की पूरी तकनीकी योजना तैयार की थी।
बाजार में मिलने वाली चीजों से बनाया घातक IED
NIA की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी ने बाजार में आसानी से उपलब्ध होने वाली चीजों का इस्तेमाल करके बेहद खतरनाक और आधुनिक IED तैयार किए थे। उसने न केवल विस्फोटक प्रणालियां बनाईं, बल्कि ड्रोन को भी ऑपरेशनल इस्तेमाल के लिए मॉडिफाई किया था। इन्हीं तकनीकों के जरिए उसने डिटोनेशन सेटअप तैयार किए, जिससे इस बड़े हमले को अंजाम दिया गया।
11 लोगों की गई थी जान
लाल किले के पास हुए इस भीषण धमाके में 11 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। जांच एजेंसियों के लिए यह चिंता का विषय है कि कैसे एक आम तकनीक और इंटरनेट पर मौजूद जानकारी का गलत इस्तेमाल कर आतंकवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि यह आधुनिक युग की एक नई और खतरनाक चुनौती है, जिससे निपटना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बेहद जरूरी हो गया है।
हाइब्रिड टेररिज्म का बढ़ता खतरा
खुफिया सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना 'हाइब्रिड टेररिज्म' का एक बड़ा उदाहरण है। इसमें आतंकी किसी विशेष ट्रेनिंग की जगह ऑनलाइन उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हैं। इससे वे न केवल कम खर्च में घातक हथियार बना लेते हैं, बल्कि अपनी गतिविधियों को आम इंटरनेट उपयोग के पीछे छिपाने में भी कामयाब रहते हैं, जिससे उन्हें पकड़ना और भी कठिन हो जाता है।
जांच और आगे की कार्रवाई
NIA की चार्जशीट से साफ है कि जसीर बिलाल वानी ने इस हमले की योजना बनाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। वह मॉड्यूल के लिए तकनीकी सहायता देने का काम करता था। फिलहाल एजेंसी इस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी गहराई से जांच कर रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। आधुनिक तकनीक का दुरुपयोग कर की गई यह साजिश पूरे देश की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ी चेतावनी है।
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