1992, यूरोप। एक ऐसा युद्ध शुरू हो चुका था जो दो सेनाओं के बीच नहीं लड़ा जा रहा था, बल्कि आम लोगों की ज़िंदगी निगल रहा था। सुबह घर से निकला व्यक्ति शाम तक घर पहुंचेगा या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं थी। एक खूबसूरत शहर खतरनाक इलाके में बदल चुका था। स्कूल बंद हो गए थे, अस्पतालों की दवाइयां खत्म हो चुकी थीं। शहर की सड़क मौत के निशाने पर थी। एक माँ अपने बच्चे का हाथ पकड़कर सड़क पार करवा रही थी, कुछ लोग रोज़ की तरह घूमने निकले थे। अचानक गोलियां चलने लगती हैं। पहली गोली, दूसरी गोली, फिर गोलियों की बौछार होने लगती है। किसी को भी समझ में नहीं आ रहा था कि गोलियां कौन चला रहा है। पहाड़ियों से स्नाइपर लोगों को निशाना बना रहे थे। लेकिन सच तो ये है कि हजारों किलोमीटर दूर से कुछ लोग अपने घर-परिवार के साथ छुट्टी मनाने नहीं निकले थे, बल्कि लोगों का शिकार करने निकले थे। ये कोई हॉलीवुड फिल्म की कहानी नहीं है, बल्कि इतिहास का वो काला अध्याय है जिसे पूरी दुनिया "साराजेवो सफारी" के नाम से जानती है।
इस घटना को समझने से पहले हमें लौटना होगा साल 1992 में। यूगोस्लाविया धीरे-धीरे टूट रहा था और उससे नए-नए देश बन रहे थे। इसी दौरान बोस्निया और हर्जेगोविना ने अपनी आज़ादी की घोषणा की, लेकिन कुछ लोग इससे नाराज़ थे। कुछ ही महीनों में युद्ध शुरू हो गया। राजधानी साराजेवो को हथियारबंद सैनिकों ने चारों तरफ से घेर लिया। ये सैनिक शहर के चारों ओर मौजूद पहाड़ियों पर तैनात हो चुके थे। साल 2022 में एक डॉक्यूमेंट्री आई और इसी डॉक्यूमेंट्री में इस घटना के बारे में ऐसे आरोप लगाए गए जिन्हें सुनकर पूरी दुनिया हैरान रह गई। कुछ गवाहों ने दावा किया कि हजारों किलोमीटर दूर से कुछ विदेशी पर्यटकों को सिर्फ इसलिए लाया जाता था ताकि वे अपने मनोरंजन के लिए आम लोगों पर गोलियां चला सकें। इसके बदले उनसे भारी रकम ली जाती थी। सबसे हैरान करने वाली बात ये थी कि बच्चों को मारने पर कीमत और भी ज़्यादा होने का दावा किया गया।
लेकिन सवाल ये था कि इन लोगों को आखिर वहां तक लाया कैसे जाता था? दरअसल, उस समय साराजेवो पूरी तरह हथियारबंद सैनिकों से घिर चुका था। सैकड़ों किलोमीटर दूर बेलग्रेड शहर था। डॉक्यूमेंट्री में कुछ गवाहों ने दावा किया कि इन लोगों को पहले बेलग्रेड एयरपोर्ट लाया जाता था और वहां से सड़क और हेलीकॉप्टर के जरिए उन पहाड़ियों तक पहुंचाया जाता था, जहां से पूरा साराजेवो साफ दिखाई देता था। एक गवाह ने दावा किया कि हर नागरिक को मारने की अलग-अलग कीमत तय होती थी। अगर गोली किसी आम नागरिक को लगती थी तो उसकी कीमत अलग होती थी, जबकि अगर गोली किसी बच्चे को लगती थी तो उसके लिए और ज्यादा पैसे दिए जाते थे। यही दावा इस पूरी कहानी का सबसे विवादित हिस्सा बन गया।
अब सवाल उठता है कि ये गवाह कौन थे? डॉक्यूमेंट्री के मुताबिक कुछ गवाह पूर्व सैनिक थे, जबकि कुछ लोग इंटेलिजेंस नेटवर्क से जुड़े हुए थे। 2022 से पहले इस कथित घटना के बारे में बहुत कम लोग जानते थे, लेकिन जैसे ही डॉक्यूमेंट्री रिलीज़ हुई, पूरी दुनिया में इसकी चर्चा शुरू हो गई। इसके साथ ही एक बड़ा सवाल भी उठने लगा कि क्या ये सब सच था या सिर्फ एक कहानी? कई सालों तक इस मामले पर कोई आपराधिक जांच नहीं हुई। दूसरी तरफ, बोस्निया सर्ब अधिकारियों ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह मनगढ़ंत बताते हुए खारिज कर दिया। लेकिन डॉक्यूमेंट्री आने के बाद बोस्निया और हर्जेगोविना के अभियोजकों ने इस मामले की जांच शुरू की। बाद में इटली ने भी यह जांच शुरू की कि कहीं इस मामले में कोई इतालवी नागरिक शामिल तो नहीं था। यह जांच अभी भी जारी है।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही था कि आखिर 1992 से 2022 तक, यानी पूरे 30 साल बाद ऐसा क्या मिला कि केस दोबारा खोला गया? डॉक्यूमेंट्री के बाद साराजेवो के मेयर ने अभियोजकों के पास एक आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई। इस शिकायत में एक ऐसी गवाही शामिल थी जो करीब 15 साल पहले दर्ज की गई थी। यह गवाही अमेरिका के पूर्व मरीन जॉन जॉर्डन की थी। उन्होंने 2007 में दावा किया था कि उन्हें ऐसे लोगों के बारे में जानकारी मिली थी जो पहाड़ियों से आम लोगों पर गोलियां चलाते थे। हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। जॉन जॉर्डन ने खुद इस घटना को अपनी आंखों से देखने का दावा नहीं किया था। उनकी जानकारी दूसरे लोगों से मिली हुई बातों पर आधारित थी। इसलिए अकेले उनकी गवाही को अंतिम सबूत नहीं माना जा सकता।
इस मामले में हालिया अपडेट 2025 में सामने आया। इटली की पत्रकार इज़ियो गावेज़ेनी ने मिलान प्रोसिक्यूटर ऑफिस में 17 पन्नों की विस्तृत आपराधिक शिकायत दर्ज कराई। उनका दावा था कि कुछ इतालवी नागरिक इस मामले में शामिल हो सकते हैं। जांच के दौरान ऐसे एक संदिग्ध से भी पूछताछ की गई जो लोगों के सामने डींगें मारता था कि वह भी उन स्नाइपरों में शामिल था जो पहाड़ियों से लोगों पर गोलियां चलाते थे। जांच के दौरान कुछ हथियार भी मिले, लेकिन ऐसे प्रत्यक्ष सबूत नहीं मिले जिनके आधार पर मुकदमा शुरू किया जा सके। अब तक का मामला मुख्य रूप से गवाहियों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है। यही वजह है कि आज भी यह सवाल बना हुआ है कि डॉक्यूमेंट्री में बताए गए आरोप पूरी तरह सच थे या नहीं। हालांकि इतना जरूर है कि बोस्निया और इटली जैसे देशों में इस मामले को लेकर जांच शुरू हुई और कई एजेंसियां इस पर काम कर रही हैं।
इतिहास के कुछ अध्याय ऐसे होते हैं जिनमें सवाल जवाबों से ज्यादा लंबे हो जाते हैं। साराजेवो सफारी भी उन्हीं घटनाओं में से एक है। एक तरफ गंभीर आरोप, दूसरी तरफ सीमित सबूत, और बीच में चलती जांच। शायद आने वाले समय में इस मामले से जुड़े और तथ्य सामने आएं। लेकिन फिलहाल यह मामला पूरी तरह सुलझा हुआ नहीं माना जा सकता।
नोट: इस लेख में जिन दावों का उल्लेख किया गया है, वे डॉक्यूमेंट्री, सार्वजनिक रिपोर्टों और चल रही जांच में सामने आए आरोपों और गवाहियों पर आधारित हैं। कई आरोप अभी भी न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं और संबंधित जांच जारी है।
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