भोपाल विकास प्राधिकरण ने भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया की पहली विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर ली है। इस प्रस्तावित क्षेत्र का कुल दायरा करीब 12 हजार वर्ग किलोमीटर होगा। इसमें सीहोर जिले का आष्टा और देवास जिले का सोनकच्छ क्षेत्र भी शामिल किया गया है, जो भोपाल और इंदौर के बीच एक अहम कनेक्टिंग जोन के रूप में विकसित होगा। रिपोर्ट को नगरीय विकास एवं आवास विभाग को सौंप दिया गया है।
छह जिलों की 30 तहसीलें और 2500 गांव शामिल
इस मेट्रोपॉलिटन एरिया में भोपाल, सीहोर, रायसेन, राजगढ़, विदिशा और नर्मदापुरम जिलों की कुल 30 तहसीलें और लगभग 2500 गांव शामिल किए जाएंगे। नर्मदापुरम जिले का सीमित हिस्सा ही इसमें जोड़ा गया है, जबकि इटारसी को इस योजना में शामिल नहीं किया गया है। प्रमुख क्षेत्रों में बैरसिया, हुजूर, कोलार, आष्टा, बुधनी, सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़ और होशंगाबाद जैसे इलाके शामिल हैं।
इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया का दायरा भी बढ़ेगा
इंदौर क्षेत्र के लिए भी समान योजना पर काम चल रहा है। पहले जहां इसका क्षेत्रफल करीब 10 हजार वर्ग किलोमीटर प्रस्तावित था, वहीं अब इसे बढ़ाकर 14 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक किया जा रहा है। इसमें कई नए शहरों और गांवों को जोड़ा जाएगा, जिससे क्षेत्रीय विकास को और गति मिलेगी।
बड़े स्तर पर विकास को मिलेगा बढ़ावा
इस योजना के लागू होने से भोपाल और इंदौर के बीच समन्वित विकास को बढ़ावा मिलेगा। सड़क, बिजली, पानी, परिवहन और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार में आसानी होगी। साथ ही जमीन अधिग्रहण, अतिक्रमण और विभागीय समन्वय जैसी समस्याएं भी कम होंगी। केंद्र सरकार की ओर से भी ऐसे बड़े शहरों के लिए विशेष आर्थिक पैकेज मिलने की संभावना है।
6 महीने में पूरी होगी विस्तृत योजना
प्राधिकरण ने सभी संबंधित विभागों से जनसंख्या, उद्योग, आय और रोजगार से जुड़े आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रिपोर्ट को अंतिम रूप देने में करीब 6 महीने का समय लग सकता है, जिसके बाद विस्तृत विकास योजना लागू की जाएगी।
क्षेत्रीय विकास को मिलेगी नई दिशा
इस फैसले से भोपाल-इंदौर क्षेत्र में शहरीकरण और विकास की रफ्तार तेज होने की उम्मीद है। साथ ही लोगों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं मिलेंगी, जिससे यह क्षेत्र प्रदेश के प्रमुख विकास केंद्र के रूप में उभर सकता है।
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