पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए पेट्रोलियम उत्पाद लेकर जा रहे दो व्यापारी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे हैं। यह मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल सप्लाई रूट्स में से एक माना जाता है, जहां मौजूदा हालात के चलते सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है।
भारतीय नौसेना अलर्ट, युद्धपोत तैयार
सूत्रों के अनुसार, इन जहाजों की सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना के युद्धपोत स्टैंडबाय पर तैनात हैं। क्षेत्र में अस्थिरता को देखते हुए किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए नौसेना पूरी तरह तैयार है। आने वाले दिनों में और भारतीय जहाज भी इसी मार्ग से गुजरने वाले हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था और अहम हो जाती है।
ईरान-अमेरिका-इस्राइल तनाव का असर
होर्मुज जलडमरूमध्य इस समय ईरान, अमेरिका और इस्राइल के बीच बढ़ते टकराव के कारण बेहद संवेदनशील बना हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अपने विरोधी देशों के जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाने की कोशिश की है, हालांकि भारतीय जहाजों को फिलहाल इस तरह की बाधा का सामना नहीं करना पड़ा है।
पहले फंसे थे 22 भारतीय जहाज
पश्चिम एशिया में संघर्ष के चलते इससे पहले 22 भारतीय जहाज इस क्षेत्र में फंस गए थे। ईरान द्वारा जलडमरूमध्य को आंशिक रूप से बाधित करने के कारण वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई थी। इससे भारत में एलपीजी की आपूर्ति पर भी असर पड़ा।
कूटनीति से सुनिश्चित हुई सुरक्षित आवाजाही
भारत सरकार ने कूटनीतिक स्तर पर हस्तक्षेप करते हुए ईरान से बातचीत की, जिसके बाद भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की गई। हाल ही में चार भारतीय जहाज—जग वसंत, पाइन गैस, शिवालिक और नंदा देवी—करीब 92 हजार मीट्रिक टन एलपीजी लेकर भारत पहुंच चुके हैं।
ऊर्जा सुरक्षा पर भारत की नजर
भारत में घरेलू और व्यावसायिक उपयोग के लिए एलपीजी की भारी मांग है। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम बन जाती है। सरकार और नौसेना दोनों मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि आपूर्ति में किसी तरह की बाधा न आए।
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