Thursday, 09 April 2026
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रेत माफिया का आतंक: मुरैना में वन आरक्षक की कुचलकर हत्या, गुना में संगठित अवैध खनन का खुलासा

MP News:  मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में रेत माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब वे कानून के रक्षकों की जान लेने से भी नहीं हिचक रहे। अंबाह रेंज क्षेत्र में गश्त के दौरान वन आरक्षक हरिकेश गुर्जर को रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली ने कुचल दिया, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

यह घटना दिमनी थाना क्षेत्र अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग 552 पर रथोल का पुरा और रानपुर के बीच हुई। वन विभाग का दल अवैध रेत परिवहन को रोकने के लिए सुबह गश्ती पर निकला था, तभी चंबल नदी के ऐसाह घाट से रेत लेकर जा रही ट्रैक्टर-ट्रॉली को रोकने की कोशिश की गई।

बताया जा रहा है कि चालक ने वाहन नहीं रोका और बेरहमी से वन आरक्षक को कुचलते हुए फरार हो गया। मृतक हरिकेश गुर्जर मुरैना जिले के सरायछोला थाना क्षेत्र के जनकपुर गांव के निवासी थे और हाल ही में उनका स्थानांतरण अंबाह रेंज में हुआ था।

घटना के बाद वन विभाग का दल शव को जिला चिकित्सालय लेकर पहुंचा, जहां पुलिस और परिजन भी मौजूद रहे। मामले में दिमनी थाना पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।


गुना में ‘कॉर्पोरेट स्टाइल’ अवैध खनन, प्रशासन पर सवाल

वहीं दूसरी ओर, गुना जिले के मधुसूदनगढ़ तहसील अंतर्गत रघुनाथपुरा क्षेत्र में अवैध रेत खनन का एक संगठित नेटवर्क सामने आया है। यहां पार्वती नदी के तट पर बिना किसी लीज या अनुमति के बड़े पैमाने पर रेत का उत्खनन किया जा रहा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, अब तक करीब 1000 घन मीटर रेत निकाली जा चुकी है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में इसका कोई उल्लेख नहीं है। हैरानी की बात यह है कि इस अवैध कारोबार को एक कंपनी की तरह व्यवस्थित तरीके से चलाया जा रहा है।

पूरी खदान को तीन हिस्सों में बांटकर तीन बड़ी पोकलेन मशीनें दिन-रात काम कर रही हैं। संचालन के लिए अलग-अलग ‘मैनेजर’ नियुक्त किए गए हैं—एक मशीनों के लिए, दूसरा ट्रैक्टरों के आवागमन और लोडिंग के लिए।

यह भी सामने आया है कि गुना की रेत को चोरी-छिपे राजगढ़ जिले में भेजकर स्टॉक किया जा रहा है, जिससे एक बड़े सिंडिकेट के सक्रिय होने की आशंका है।


कागजों में कार्रवाई, जमीन पर सन्नाटा

एसडीएम राघौगढ़ द्वारा 18 फरवरी 2026 को संयुक्त गश्ती दल के गठन का आदेश जारी किया गया था, जिसमें तहसीलदार, थाना प्रभारी, खनिज निरीक्षक और राजस्व अमले को शामिल किया गया था। आदेश में प्रतिदिन गश्त और अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।

हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित है और धरातल पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर प्रशासन की जानकारी के बिना इतने बड़े स्तर पर अवैध खनन कैसे संभव है।


पर्यावरण और कानून दोनों पर खतरा

रघुनाथपुरा में हो रहे अवैध खनन से न सिर्फ सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है, बल्कि पार्वती नदी के अस्तित्व पर भी संकट मंडरा रहा है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बाहरी जिलों के लोग प्रशासनिक संरक्षण में मिलकर प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन कर रहे हैं, जबकि स्थानीय लोगों के अधिकारों की अनदेखी की जा रही है।


सवालों के घेरे में सिस्टम

मुरैना में वन आरक्षक की हत्या और गुना में संगठित अवैध खनन—दोनों घटनाएं इस बात की ओर इशारा करती हैं कि प्रदेश में रेत माफियाओं का नेटवर्क कितना मजबूत हो चुका है।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इन माफियाओं पर सख्त कार्रवाई कर पाएगा, या फिर कानून का डर यूं ही खत्म होता रहेगा?

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