Friday, 29 May 2026
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कोटवारों से चौकीदारी नहीं, कराई जा रही निजी चाकरी! बमोरी तहसील में फर्जी नियुक्ति, वेतन भुगतान और अधिकारियों की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

 गुना जिले की बमोरी तहसील में पदस्थ कोटवारों (चौकीदारों) को उनके मूल कार्य से हटाकर अधिकारियों के निजी कार्यों में लगाए जाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि कई कोटवार गांवों में चौकीदारी और प्रशासनिक सूचना पहुंचाने के बजाय अधिकारियों के बंगलों, कलेक्ट्रेट और निजी कार्यों में तैनात हैं। वहीं कई नियुक्तियों को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

गांव की चौकीदारी छोड़ अधिकारियों के निजी कार्यों में लगे कोटवार

बमोरी तहसील में पदस्थ करीब 14 कोटवारों को गांवों से हटाकर अधिकारियों ने गुना शहर में अपने निजी कार्यों में लगा रखा है। आरोप है कि कुछ कोटवार अधिकारियों के बंगलों पर घरेलू काम कर रहे हैं, जबकि कुछ बच्चों को स्कूल छोड़ने और लाने जैसे निजी कार्यों में लगे हुए हैं। वहीं कुछ को कलेक्ट्रेट कार्यालय में पदस्थ किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे गांव स्तर पर प्रशासन और जनता के बीच सूचना तंत्र कमजोर हो गया है।

नियुक्तियों में अनियमितता के आरोप

कोटवारों की नियुक्तियों को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कई कोटवार उस गांव के निवासी ही नहीं हैं, जहां उनकी नियुक्ति की गई है। नियमों के अनुसार कोटवार का उसी गांव का मूल निवासी होना आवश्यक माना जाता है। सूत्रों के मुताबिक कुछ मामलों में नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज तक तहसील कार्यालय में उपलब्ध नहीं हैं, बावजूद इसके संबंधित लोग कोटवार के रूप में कार्यरत हैं।

चुनाव लड़ने वाले कोटवार की दोबारा नियुक्ति पर विवाद

लालोनी निवासी कोटवार बालक राम सहरिया का मामला भी चर्चा में है। जानकारी के अनुसार उन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए पहले अपने पद से इस्तीफा दिया था और चुनाव भी लड़ा था। इसके बावजूद बाद में उन्हें फिर से कोटवार पद पर नियुक्त कर दिया गया। आरोप है कि लंबे समय तक अनुपस्थित रहने के बावजूद उन्हें पूरा वेतन दिया गया, जिससे शासन को आर्थिक नुकसान हुआ। वहीं नियुक्ति संबंधी रिकॉर्ड भी तहसील कार्यालय में उपलब्ध नहीं बताए जा रहे हैं।

गांवों में सूचना तंत्र प्रभावित, आगजनी की घटनाओं पर चिंता

कोटवारों का मुख्य कार्य गांवों में शासन की योजनाओं की जानकारी पहुंचाना, आगजनी, बीमारियों, अतिक्रमण और अन्य घटनाओं की सूचना प्रशासन तक पहुंचाना होता है। बमोरी क्षेत्र में हाल के समय में आगजनी की कई घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि कोटवार गांवों में सक्रिय नहीं हैं। शासन की ओर से प्रत्येक कोटवार को प्रतिमाह लगभग 8 हजार रुपए मानदेय दिया जाता है, बावजूद इसके कई कोटवार अधिकारियों के निजी कार्यों में लगे हुए बताए जा रहे हैं। साथ ही यह भी आरोप है कि सेवानिवृत्ति अवधि पूरी कर चुके कुछ कोटवारों को भी भुगतान जारी है, जबकि नई भर्ती नहीं की जा रही।


रिपोर्ट: मनोहर प्रजापति

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