मध्यप्रदेश में मंत्रिमंडल का पुनर्गठन जल्द होगा, इस बात की चर्चा पिछले छह माह से चल रही है... यदा-कदा तो यह भी अफवाह फैलती रही है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव की पार्टी हाईकमान से भी चर्चा हो चुकी है और बस एक-दो दिन में मंत्रिमंडल का विस्तार हो जाएगा.. हालांकि यह चर्चा मोहन मंत्रिमंडल के गठन के दिन से ही चालू हो गई थी कि अगला विस्तार जल्द ही होगा... क्योंकि गठन के समय मंत्री के चार पद रिक्त छोड़ दिए गए थे... खैर... आखिर मंत्रिमंडल का विस्तार कब होगा, इस बात पर गौर करें तो यह लगभग तय माना जा रहा है कि बंगाल चुनाव परिणाम के पश्चात, अर्थात 10 मई के बाद ही मंत्रिमंडल का पुनर्गठन होगा... बहरहाल, मंत्रिमंडल का गठन कब होगा, कब नहीं, यह और बात है, लेकिन मंत्रिमंडल विस्तार की खबरों के बीच सिंधिया खेमे के माने जाने वाले तीनों मंत्रियों में ही आपसी खींचतान चल पड़ी है। यह चर्चा अब राजनीतिक गलियारों से निकलकर आम जन तक पहुंचने लगी है... ये तीनों मंत्री कौन हैं, शायद यह राजनीति का ककहरा न जानने वाले को भी यह बताने की जरूरत नहीं है... आपको बता दें कि तीनों के राजनीतिक आका एक ही हैं... लेकिन पहले दिन से ही तीनों के बीच आपसी मतभेद जबरदस्त रहा है...
आखिर तीनों के बीच क्यों खींचतान चल रही है, तो उसके मुख्य कारण हैं पूर्व मंत्री प्रभुराम चौधरी... दरअसल, जब मंत्रिमंडल का गठन हो रहा था, तब सिंधिया के कोटे से चार मंत्री बनाए जाने की सहमति हुई—ऐसा राजनीतिक हलकों में चर्चा हो रही थी—जिसके अनुसार तीनों मंत्रियों के साथ प्रभुराम चौधरी का नाम भी शपथ लेने वालों की सूची में शामिल था... सही भी था, प्रभुराम चौधरी मंत्री पद की शपथ लेने की तैयारी भी कर चुके थे। उनके बंगले में ढोल-नगाड़ों की गूंज भी हो रही थी, लेकिन ऐन वक्त पर उनका नाम कट गया... सूत्रों के हवाले से जो जानकारी मिली, उसके मुताबिक दिल्ली से खबर आई कि सिंधिया कोटे से तीन ही मंत्री बनाए जाएंगे... फिर क्या था, मन मसोस कर प्रभुराम चौधरी का नाम हटाना पड़ा... लेकिन उनसे यह भी वादा किया गया कि जब भी मंत्रिमंडल का अगला गठन होगा, तो उनको जरूर स्थान मिलेगा...
ऐसे में यदि मई महीने में पुनर्गठन होता है, तो प्रभुराम को एडजस्ट करने के लिए तीन में से एक का मंत्री पद जाना तय माना जा रहा है... बस यही कारण है कि तीनों मंत्री अपनी-अपनी सेटिंग बिठाने के लिए अभी से गुणा-भाग करने लगे हैं, जिससे उनका मंत्री पद यथावत बना रहे... इसी राजनीतिक समीकरण के तहत एक मंत्री जी का तो कांग्रेस प्रेम ही फिर जाग उठा है... जनाब ने कांग्रेस के एक बड़े नेता को पटा लिया है, जिससे दूसरे दो मंत्रियों पर वह घपले-घोटाले के आरोप लगवा सके... खबर यह भी है कि मंत्री महोदय ने कांग्रेस के उस बड़े नेता को खुश करने के लिए उनके समर्थक ठेकेदारों को भी उपकृत करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है... विभाग में सप्लाई का कोई काम हो या निर्माण का, मंत्री जी के विभाग में उन कांग्रेसी नेता का ही डंका बज रहा है... और डंका बजवा रहे हैं मंत्री जी... वाह मंत्री जी, वाह... इसी को कहते हैं—न हींग लगे, न फिटकरी, रंग चोखा...
अर्थात खुद विपक्ष के आरोपों से तो बचेंगे ही, मगर जिसको वह नहीं पसंद कर रहे, उस पर विपक्ष हमलावर होगा... यही तो राजनीति है, लेकिन इस राजनीति में जनता के बीच छवि किसकी धूमिल होगी, यह गौर करने वाली बात है... शायद यह बात भाजपा संगठन के गलियारों तक भी पहुंच गई है... और यदि ऐसा हुआ, तो फिर वो माननीय न घर के रहेंगे, न घाट के... क्योंकि यह कांग्रेस नहीं है, यह भाजपा है और इसके संगठन की राय सर्वोपरि होती है... फिर चाहे किसी भी बड़े नेता की सिफारिश क्यों न आ जाए, संगठन ने जिस बात पर मोहर लगा दी, वही होगा...
अंत में यही कहेंगे—मंत्री जी, जरा बच के गोटियां बिठाइए...
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