मध्यप्रदेश विधानसभा में कभी चूड़ी-चप्पल कांड हुआ था। यह वाकया ज्यादातर लोग जानते हैं, लेकिन कब और क्यों हुआ था, इस बारे में कुछ लोग ही जानते होंगे... दरअसल बात 1991 की है, जब सुन्दरलाल पटवा मुख्यमंत्री हुआ करते थे और कांग्रेस विपक्ष में थी। और श्यामाचरण शुक्ल नेता प्रतिपक्ष थे... उस समय विधानसभा का शीतकालीन सत्र चल रहा था...
इसी सत्र के दौरान कांग्रेस की विधायक कल्याणी पांडे ने अपने क्षेत्र जबलपुर जिले की पाटन विधानसभा में डॉक्टरों की कमी को लेकर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लेकर आईं, मगर तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष उनके ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा कराने की अनुमति नहीं दे रहे थे। ऐसे में कल्याणी पांडे गर्भगृह से होते हुए मुख्यमंत्री पटवा के पास पहुँचीं और कलाई से चूड़ी उतारकर पटवा के समक्ष टेबल पर रख दी। बस फिर क्या था, सदन में सत्तापक्ष के विधायक हंगामा करने लगे। इसी बीच रहली से भाजपा से चुनाव जीतकर आए गोपाल भार्गव, जो तीसरी लाइन में बैठे थे, उन्होंने यह कह दिया कि चूड़ी तो शादीशुदा महिलाएँ पहनती हैं, ऐसे में जो कल्याणी पांडे ने चूड़ी भेंट की है, तो वो ये बताएँ कि वो शादीशुदा हैं या कुँवारी...
गोपाल भार्गव का इतना कहना था कि कल्याणी पांडे ने पैर से चप्पल निकालकर गोपाल भार्गव की ओर फेंका... मजे की बात यह रही कि चप्पल गोपाल भार्गव को तो नहीं लगा, हाँ उनके आगे खड़े दूसरे विधायक को ज़रूर लग गई। फिर क्या था, समूचे सदन हाल में मारो-मारो, बचाओ-बचाओ जैसी आवाज़ें आने लगीं और हो-हल्ला अध्यक्ष महोदय के कंट्रोल से बाहर हो गया।
मामला बिगड़ता देख अध्यक्ष महोदय ने सदन की कार्यवाही स्थगित करके अपने कक्ष में चले गए। उधर उनके कक्ष में जाते ही विपक्षी दल के विधायक भी घुस गए। धक्का-मुक्की में उसी समय टेबल पर रखा राष्ट्रीय ध्वज ज़मीन पर गिर गया। नतीजा रहा कि चूड़ी-चप्पल से ज्यादा राष्ट्रीय ध्वज के अपमान के मामले ने तूल पकड़ लिया...
खैर, ध्वज के अपमान के मामले में क्या कार्यवाही हुई, यह बाद में बताएँगे। फिर बात करते हैं कल्याणी पांडे के चप्पल फेंकने की... किसी तरह जब मामला शांत हुआ और फिर सदन की कार्यवाही चालू हुई तो मुख्यमंत्री पटवा ने गोपाल भार्गव के बयान पर खेद व्यक्त किया और कहा कि कल्याणी पांडे उनकी बेटी जैसी हैं। जो भी हुआ उसका हमें अत्यंत दुख है...
पटवा जी बोलते हुए इतना भावुक हो गए कि वो सदन में ही रो पड़े। बाद में किसी तरह मामला शांत हुआ और सदन की कार्यवाही चालू तो हो गई, मगर उधर विपक्ष के चार विधायकों पर राष्ट्रध्वज के अपमान को लेकर सदस्यता समाप्त होने की तलवार लटक गई...
खैर, ये चार विधायक कौन थे और आगे क्या हुआ, ये हम बताएँगे... लेकिन अगले एपिसोड में..
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