इंदौर में आयोजित ब्रिक्स युवा परिषद उद्यमिता कार्य समूह की बैठक में दुनिया की आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले देशों ने युवा शक्ति को भविष्य की सबसे बड़ी ताकत बताया। बैठक में ब्रिक्स देशों के युवा उद्यमी, नीति-निर्माता और प्रतिनिधि एक मंच पर आए, जहां नवाचार, रोजगार, स्टार्टअप और उद्यमिता को लेकर व्यापक चर्चा हुई।
युवा शक्ति तय करेगी वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा
बैठक को संबोधित करते हुए मनसुख मांडविया ने कहा कि ब्रिक्स देशों की जनसांख्यिकीय ताकत उन्हें वैश्विक अर्थव्यवस्था और विकास की दिशा तय करने का अवसर देती है। उन्होंने बताया कि भारत समेत कई सदस्य देशों में 35 वर्ष से कम आयु के युवाओं की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक है, जो इन देशों की सबसे बड़ी शक्ति है।
65 फीसदी युवा आबादी के दम पर आगे बढ़ रहा भारत
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए परिषद को संबोधित करते हुए डॉ. मांडविया ने कहा कि भारत की लगभग 65 फीसदी आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है। यही युवा शक्ति देश को नवाचार, कौशल विकास और उद्यमिता के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रही है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने डिजिटल समावेशन, कौशल विकास और रोजगार आधारित मॉडल पर तेजी से काम किया है, जिसके चलते देश दुनिया के प्रमुख स्टार्टअप और इनोवेशन हब में शामिल हुआ है।
छोटे शहरों से उभर रहे नए स्टार्टअप मॉडल
बैठक में युवा-नेतृत्व वाले स्टार्टअप और नवाचार पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। रक्षा निखिल खडसे ने कहा कि जब ब्रिक्स देश एक-दूसरे के अनुभव साझा करते हैं, तब स्थानीय स्तर के विचार वैश्विक प्रभाव पैदा करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के छोटे शहरों और उभरते नगरों के युवा तेजी से नए उद्यम स्थापित कर रहे हैं, जो समावेशी विकास का संकेत है।
एआई, फिनटेक और ग्रीन एनर्जी पर हुई खास चर्चा
बैठक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), फिनटेक, एग्रीटेक, हरित ऊर्जा, सामाजिक उद्यमिता और पर्यावरण अनुकूल व्यापार मॉडल जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। युवाओं के लिए उभरते अवसरों और वैश्विक साझेदारी को लेकर भी विचार-विमर्श हुआ। उद्घाटन सत्र में विश्वास कैलाश सारंग, डॉ. पल्लवी जैन गोविल सहित ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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