आयुष्मान योजना पर सख्ती पड़ी भारी? IAS संदीप यादव का ट्रांसफर चर्चा में...
मध्य प्रदेश
प्रदेश में हाल ही में कई IAS अधिकारियों का स्थानांतरण किया गया, जिनमें कुछ जूनियर अधिकारी भी शामिल थे। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा एक वरिष्ठ अधिकारी के ट्रांसफर की रही।
2000 बैच के IAS अधिकारी संदीप यादव, जो प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में पदस्थ थे, उनका ट्रांसफर कर दिया गया। संदीप यादव अपनी साफ छवि, स्पष्टवादिता और काम में बाहरी दखलंदाजी नापसंद करने के लिए जाने जाते हैं।
आयुष्मान योजना में धांधली की शिकायतों के बाद सख्ती
सूत्रों के अनुसार, आयुष्मान योजना में फर्जी बिलिंग और अनियमितताओं की लगातार शिकायतें मिल रही थीं।
प्रदेश में गली-मोहल्लों में संचालित छोटे नर्सिंग होम इस योजना के तहत तेजी से बढ़ रहे थे। इन पर नियंत्रण के लिए संदीप यादव ने NABH मानकों को सख्ती से लागू करने का आदेश जारी किया।
क्या है NABH और क्यों जरूरी है
NABH (National Accreditation Board for Hospitals) अस्पतालों की गुणवत्ता, मरीज सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया मानक है।
इसका उद्देश्य:
बेहतर इलाज सुनिश्चित करना
क्लिनिकल गुणवत्ता बनाए रखना
फर्जी बिलिंग पर रोक लगाना
इलाज की वास्तविकता और बिलिंग की पारदर्शिता तय करना
2026 तक NABH फाइनल सर्टिफिकेशन अनिवार्य
संदीप यादव ने आदेश दिया कि आयुष्मान योजना में बने रहने के लिए 2026 तक सभी नर्सिंग होम को फाइनल लेवल NABH सर्टिफिकेशन लेना अनिवार्य होगा।
इस आदेश के बाद प्रदेश भर के हजारों नर्सिंग होम संचालकों में हड़कंप मच गया।
नर्सिंग होम एसोसिएशन का विरोध और कानूनी लड़ाई
आदेश जारी होने के बाद:
नर्सिंग होम संचालकों ने बैठक की
डेलीगेशन प्रमुख सचिव से मिलने पहुंचा
लेकिन संदीप यादव ने नियमों पर कोई समझौता नहीं किया
इसके बाद एसोसिएशन ने:
मुख्य सचिव को ज्ञापन दिया
मुख्य सचिव ने मामला फिर स्वास्थ्य विभाग को भेज दिया
इसके बाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई गई
हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि यह आदेश स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधार और जनता के हित में है।
ट्रांसफर के बाद नई जिम्मेदारी — वन विभाग
अब संदीप यादव को वन विभाग में पदस्थ किया गया है।
उम्मीद जताई जा रही है कि जिस तरह उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में सख्ती दिखाई, उसी तरह वन माफिया पर भी कार्रवाई करेंगे।
2000 बैच के IAS अधिकारी संदीप यादव, जो प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में पदस्थ थे, उनका ट्रांसफर कर दिया गया। संदीप यादव अपनी साफ छवि, स्पष्टवादिता और काम में बाहरी दखलंदाजी नापसंद करने के लिए जाने जाते हैं।
आयुष्मान योजना में धांधली की शिकायतों के बाद सख्ती
सूत्रों के अनुसार, आयुष्मान योजना में फर्जी बिलिंग और अनियमितताओं की लगातार शिकायतें मिल रही थीं।
प्रदेश में गली-मोहल्लों में संचालित छोटे नर्सिंग होम इस योजना के तहत तेजी से बढ़ रहे थे। इन पर नियंत्रण के लिए संदीप यादव ने NABH मानकों को सख्ती से लागू करने का आदेश जारी किया।
क्या है NABH और क्यों जरूरी है
NABH (National Accreditation Board for Hospitals) अस्पतालों की गुणवत्ता, मरीज सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया मानक है।
इसका उद्देश्य:
बेहतर इलाज सुनिश्चित करना
क्लिनिकल गुणवत्ता बनाए रखना
फर्जी बिलिंग पर रोक लगाना
इलाज की वास्तविकता और बिलिंग की पारदर्शिता तय करना
2026 तक NABH फाइनल सर्टिफिकेशन अनिवार्य
संदीप यादव ने आदेश दिया कि आयुष्मान योजना में बने रहने के लिए 2026 तक सभी नर्सिंग होम को फाइनल लेवल NABH सर्टिफिकेशन लेना अनिवार्य होगा।
इस आदेश के बाद प्रदेश भर के हजारों नर्सिंग होम संचालकों में हड़कंप मच गया।
नर्सिंग होम एसोसिएशन का विरोध और कानूनी लड़ाई
आदेश जारी होने के बाद:
नर्सिंग होम संचालकों ने बैठक की
डेलीगेशन प्रमुख सचिव से मिलने पहुंचा
लेकिन संदीप यादव ने नियमों पर कोई समझौता नहीं किया
इसके बाद एसोसिएशन ने:
मुख्य सचिव को ज्ञापन दिया
मुख्य सचिव ने मामला फिर स्वास्थ्य विभाग को भेज दिया
इसके बाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई गई
हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि यह आदेश स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधार और जनता के हित में है।
ट्रांसफर के बाद नई जिम्मेदारी — वन विभाग
अब संदीप यादव को वन विभाग में पदस्थ किया गया है।
उम्मीद जताई जा रही है कि जिस तरह उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में सख्ती दिखाई, उसी तरह वन माफिया पर भी कार्रवाई करेंगे।
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