टीवी इतिहास के सबसे यादगार किरदारों में से एक ‘बेताल’ को जीवंत बनाने वाले अभिनेता सज्जन लाल पुरोहित को आज भी लोग उसी किरदार से याद करते हैं। 1980 के दशक में आए टीवी शो ‘विक्रम और बेताल’ ने उन्हें घर-घर पहचान दिलाई, जबकि वह इससे पहले पांच दशक तक फिल्मों में सक्रिय रहे थे।
1921 में जन्म, वकील बनने का था सपना
सज्जन लाल पुरोहित का जन्म 1921 में हुआ था। उन्होंने जोधपुर के जसवंत कॉलेज से पढ़ाई की और शुरुआत में वकालत करने का सपना देखा था। हालांकि, किस्मत उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में ले आई और उन्होंने 1950 के दशक से फिल्मों में काम शुरू किया।
फिल्म इंडस्ट्री में लंबा सफर
सज्जन ने ‘बीस साल बाद’, ‘चलती का नाम गाड़ी’, ‘जॉनी मेरा नाम’, ‘रेल का डिब्बा’ और ‘झुमरू’ जैसी फिल्मों में काम किया। वह कभी हीरो तो कभी सपोर्टिंग रोल में नजर आए और धीरे-धीरे इंडस्ट्री में अपनी मजबूत पहचान बनाई।
ईस्ट इंडिया कंपनी से फिल्मों तक का सफर
1941 में वह कोलकाता गए और ईस्ट इंडिया कंपनी में अप्रेंटिस के तौर पर काम किया। इसी दौरान उन्होंने फिल्मों में एक्स्ट्रा के तौर पर काम शुरू किया। बाद में वह मुंबई पहुंचे और निर्देशक किदार शर्मा के साथ काम किया। उस दौर में राज कपूर भी वहीं असिस्टेंट थे।
डायलॉग और गीत लिखने में भी हाथ आजमाया
सज्जन ने सिर्फ एक्टिंग ही नहीं बल्कि फिल्मों के डायलॉग और गीत लिखने का काम भी किया। 40 के दशक से लेकर 60 के दशक तक उन्होंने फिल्मों में लगातार काम किया और इंडस्ट्री में मजबूत पकड़ बनाई।
‘विक्रम और बेताल’ में ऐसे मिला बेताल का रोल
‘विक्रम और बेताल’ की कहानी प्रेम सागर ने लिखी थी। सज्जन उनके परिवार के करीबी थे, इसलिए उन्हें बेताल का रोल ऑफर किया गया। इस किरदार में उनकी आवाज, हंसी और मेकअप ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी।
फीस विवाद के बाद शो छोड़ा
शो की सफलता के बाद सज्जन ने फीस बढ़ाने की मांग की, जिसे प्रोड्यूसर्स ने स्वीकार नहीं किया। इसके बाद उन्होंने शो छोड़ दिया। हालांकि मेकर्स ने पुरानी फुटेज और वॉइस ओवर के जरिए किरदार को जारी रखा।
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