
वैश्विक करेंसी बाजार में डॉलर कमजोर, एशियाई मुद्राएं मजबूत
वैश्विक मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर दबाव में दिखाई दे रहा है। जापान की येन, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और चीन की युआन लगातार मजबूत हो रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक निवेश का रुख बदलने से डॉलर की पकड़ कमजोर पड़ रही है और जापान इस दौर का संभावित बड़ा विजेता बनकर उभर रहा है।
2025 के बाद 2026 की शुरुआत में डॉलर को बड़ा झटका
जनवरी 2026 के शुरुआती हफ्तों में डॉलर चार साल के निचले स्तर पर पहुंच गया। यूरो और पाउंड के मुकाबले भी डॉलर में गिरावट दर्ज की गई। करीब एक सप्ताह में डॉलर लगभग 3% तक कमजोर हुआ, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ गई।
अमेरिका के रोजगार आंकड़ों से मिली थोड़ी राहत
हाल ही में अमेरिका की बेहतर रोजगार रिपोर्ट ने डॉलर को थोड़े समय के लिए सहारा दिया। जनवरी में रोजगार वृद्धि उम्मीद से ज्यादा रही और बेरोजगारी दर घटकर 4.3% पर आ गई। हालांकि, निवेशक अब वैश्विक विकास संकेतों को ज्यादा महत्व दे रहे हैं।
जापान चुनाव के बाद येन में तेजी
जापान में चुनाव के बाद मजबूत सरकार बनने से येन में 2.6% से ज्यादा की तेजी आई। बाजार को उम्मीद है कि स्थिर राजनीतिक स्थिति और विकास पर फोकस से जापानी अर्थव्यवस्था और मजबूत हो सकती है।
डॉलर के मुकाबले येन ने निवेशकों को चौंकाया
डॉलर के मुकाबले येन 152-153 के स्तर के आसपास मजबूत बना हुआ है। कई वर्षों की गिरावट के बाद यह उछाल निवेशकों का ध्यान खींच रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि अगर येन 150 के स्तर के नीचे जाता है तो तेजी और तेज हो सकती है।
यूरो को भी टक्कर दे रहा है येन
विदेशी निवेशक जापान के शेयर और बॉन्ड बाजार में निवेश बढ़ा रहे हैं। इससे येन यूरो के विकल्प के रूप में उभर रहा है। हाल ही में येन ने यूरो के मुकाबले भी मजबूती दिखाई है।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और युआन भी मजबूत
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर भी तीन साल के उच्च स्तर के करीब पहुंच रहा है। वहीं चीन की युआन निर्यात बढ़ने और मजबूत मुद्रा नीति संकेतों के कारण मजबूत बनी हुई है। हाल के समय में डॉलर पर सबसे ज्यादा दबाव युआन से ही आया है।
लंबे समय बाद डॉलर में कमजोरी का ट्रेंड
पिछले दशक में डॉलर मजबूत बना रहा था, खासकर 2020 से 2022 के बीच। लेकिन 2025 के बाद वैश्विक व्यापार और निवेश पैटर्न बदलने से डॉलर में कमजोरी का ट्रेंड देखने को मिल रहा है।
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