Saturday, 21 February 2026
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क्या भारत में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर लगेगी रोक? राज्यों में शुरू हुई बहस

भारत में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक को लेकर बहस तेज। कुछ राज्यों ने ऑस्ट्रेलिया मॉडल का अध्ययन शुरू किया, आर्थिक सर्वेक्षण में भी सिफारिश।

नई दिल्ली। भारत में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर पाबंदी लगाने को लेकर बहस तेज हो गई है। दक्षिण भारत के कुछ राज्यों ने कहा है कि वे इस तरह की रोक पर विचार कर रहे हैं। हाल ही में पेश आर्थिक सर्वेक्षण में भी सुझाव दिया गया है कि केंद्र सरकार उम्र के आधार पर सोशल मीडिया इस्तेमाल की सीमा तय करने पर विचार करे।

ऑस्ट्रेलिया मॉडल पर नजर

ऑस्ट्रेलिया हाल ही में ऐसा कानून लागू करने वाला पहला देश बना है, जहां 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए ज्यादातर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रोक लगा दी गई है। कंपनियों को यूजर्स की उम्र की पुष्टि करना अनिवार्य किया गया है। फ्रांस और ब्रिटेन में भी ऐसे नियमों पर चर्चा चल रही है।

इसी तर्ज पर आंध्र प्रदेश में टीडीपी विधायक एलएसके देवरायलु ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाने का प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया है। हालांकि ऐसे बिल के कानून बनने की संभावना कम मानी जाती है, लेकिन इसने बहस को जरूर तेज कर दिया है।

राज्यों की पहल

आंध्र प्रदेश सरकार ने वैश्विक नियमों का अध्ययन करने के लिए मंत्रियों का समूह बनाया है। राज्य के आईटी मंत्री नारा लोकेश ने कहा कि बच्चों का सोशल मीडिया का लगातार और बेलगाम इस्तेमाल उनकी पढ़ाई और एकाग्रता को प्रभावित कर रहा है।

गोवा और कर्नाटक ने भी इस मुद्दे पर चर्चा शुरू की है। कर्नाटक के आईटी मंत्री ने ‘डिजिटल डिटॉक्स’ कार्यक्रम का जिक्र किया, जिसमें लाखों छात्रों और शिक्षकों को शामिल किया गया है।

उम्र की पुष्टि बड़ी चुनौती

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत जैसे बड़े और विविध देश में उम्र की पुष्टि करना आसान नहीं होगा। कई बच्चे नकली जन्मतिथि डालकर अकाउंट बना लेते हैं। डिजिटल अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि राज्य स्तर पर अलग-अलग नियम लागू करने से कानूनी और तकनीकी दिक्कतें पैदा हो सकती हैं।

क्या पाबंदी ही समाधान है?

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि पूरी तरह पाबंदी लगाना एक सीमित समाधान हो सकता है। कई माता-पिता मानते हैं कि असली समस्या बच्चों को मोबाइल देना और उन पर निगरानी न रखना है। उनका कहना है कि सिर्फ कानून से नहीं, बल्कि जागरूकता और जिम्मेदारी से भी बदलाव लाना होगा।

फिलहाल केंद्र सरकार ने कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है, लेकिन बहस साफ संकेत दे रही है कि आने वाले समय में बच्चों के डिजिटल इस्तेमाल पर सख्त नियम बन सकते हैं |

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